शहर के 11 मार्गों पर बने 30 से ज्यादा फुटपाथों पर हो गए कब्जे, कहां चलें राहगीर
– कहीं पर अवैध पार्किंग बन गई तो कहीं से बसें संचालित हो रहीं
– गौरव पथ पर पार्किंग, खोखे, ठेले संचालित हो रहे, कुछ जगह से फुटपाथ ही गायब
– नगर निगम की मेहरबानी, अतिक्रमण शाखा नहीं कर पा रही काम, निगरानी जरूरी
अलवर. शहर के 11 मार्गों पर बने 30 से अधिक फुटपाथों पर कब्जे हो गई। अधिकांश जगहों पर अवैध पार्किंग संचालित है। कहीं पर फोर व्हीलर गाडि़यां खड़ी की जा रही हैं तो कहीं पर दोपहिया। खोखे- ठेले हर जगह लगे हुए हैं। कई जगह से फुटपाथ ही गायब हो गए। नगर निगम की मेहरबानी से फुटपाथों पर कब्जे हुए। अब सवाल खड़ा है कि आखिर राहगीर चलें तो कहां? सड़क पर खतरा मोल लेकर राहगीर चलने का विवश हैं।
मरीज व तीमारदार सड़क पर चलने का विवश
शहर का प्रमुख मार्ग जेल सर्किल से लेकर भवानी तोप तक का है। इसे गौरव पथ भी कहते हैं। करीब तीन किमी के इस मार्ग पर दोनों ओर कब्जे ही कब्जे हैं। यहां चलने के फुटपाथ था जो आज गायब है। सामान्य अस्पताल के पास निजी व सरकारी एंबुलेंस फुटपाथ पर खड़ी हो रही हैं। साथ ही खाने के खोखे भी यहां लग गए। बिजलीघर चौराहे से आगे जेल सर्किल की ओर बढ़ते हैं तो दायीं ओर खोखे ही खोखे फुटपाथ पर लग गए। मरीजों से लेकर अन्य लोग सड़क पर चलते हैं। एसएमडी सर्किल से लेकर भवानी तोप तक कुछ फुटपाथ जरूर बचा है।
अवैध बस स्टैंड फुटपाथ पर चल रहा
इसी तरह काली मोरी में बस स्टैंड के पास निजी बसों का बस स्टैंड फुटपाथ पर चल रहा है। यहां रेत इतनी है कि फुटपाथ ही ढक गया। यहां से लेकर रेलवे स्टेशन तक फुटपाथ कहीं पर दिखाई देता है तो कहीं पर नहीं। रेलवे स्टेशन से लेकर बिजलीघर मार्ग व अग्रसेन मार्ग पर फुटपाथ गायब है। अधिकांश जगहों पर खोखे लग गए हैं। कुछ जगह पटाव आदि का व्यवसाय चल रहा है। नंगली सर्किल पर दुकानों की साइड में फुटपाथ पार्किंग का रूप ले चुका है। सभी टाइलें गाडि़यों से ढक गई हैं। यहीं से लेकर पीडब्ल्यूडी कार्यालय तक फुटपाथ ढका हुआ है।
खोखे लग गए तो कहीं रेत ने ढक दिए फुटपाथ
इसी तरह एसएमडी सर्किल से लेकर काशीराम चौराहे तक फुटपाथ पर खोखे लगे हैं। कुछ जगह फुटपाथ रेत के कारण ढक गया। कुछ जगह जंगली घास उग आई। हनुमान सर्किल के चारों ओर भी फुटपाथ बनाया गया था लेकिन वहां भी कब्जे हो गए। वाहनों की पार्किंग के रूप में फुटपाथ प्रयोग हो रहे हैं। अग्रसेन पुल से लेकर 200 फीट मार्ग पर ग्रीनबेल्ट के साथ फुटपाथ बनाया गया था लेकिन यहां पशु आदि बांधे जा रहे हैं। यूआईटी कार्यालय के सामने फुटपाथ पर पार्किंग बन गई। यहां से लेकर घंटाघर तक कहीं भी फुटपाथ नजर नहीं आता। दुकानदारों ने फुटपाथ तक सामान रख लिया है। होप सर्कस के आसपास भी यही आलम है।
अतिक्रमण शाखा में बदलाव की जरूरत
लोगों का कहना है कि नगर निगम में अतिक्रमण शाखा नाम की बनाई गई है। अतिक्रमण पर निगरानी नहीं कर पा रही है। इसमें बदलाव की जरूरत है। किसी दूसरे कर्मचारियों को इसकी जिम्मेदारी दी जाए तो शहर के फुटपाथ खाली हो सकते हैं।
जहां-जहां फुटपाथों पर कब्जे हुए हैं वहां अभियान चलाकर हटवाए जाएंगे। फुटपाथ चलने के लिए बनाए गए हैं कब्जे के लिए नहीं। इसके लिए प्लान बनाया जाएगा।
— मनीष कुमार, नगर आयुक्त