11 फ़रवरी 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अलवर

शिक्षक दिवस विशेष: नई शिक्षा नीति पर क्या है शिक्षकों की राय? देखें यहां

राजस्थान पत्रिका ने शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में नवीन स्कूल में एक टॉक-शो का आयोजन किया। जिसमें शिक्षकों ने खुलकर अपनी बात रखी।

Google source verification

राजस्थान पत्रिका ने शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में नवीन स्कूल में एक टॉक-शो का आयोजन किया। जिसमें शिक्षकों ने खुलकर अपनी बात रखी। शिक्षकों का यही कहना था कि शिक्षा को रोजगार से जोड़ना चाहिए। साथ ही विदेशी कोर्सेज का हमारी पढ़ाई में समावेश होना चाहिए, ताकि बच्चों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा में हो रहे नवाचारों का ज्ञान हो सके।

सरकारी तंत्र को कठोर होना पड़ेगा। कक्षाओं में विद्यार्थी अध्ययन के लिए नहीं आते हैं। इस प्रवृत्ति को खत्म करना होगा। विश्वविद्यालयों में भी सुविधाएं विकसित करने की दरकार है। आधुनिक और विदेशी कोर्स भी शुरू होने चाहिए, ताकि बच्चा समय के साथ चल सके।

हुकम सिंह, रिटायर्ड प्राचार्य, राजर्षि कॉलेज

नई शिक्षा नीति से हमारी शैक्षणिक ढांचे में खास परिवर्तन होगा। इससे बच्चों को पढ़ने के ज्यादा अवसर मिलेंगे। साथ ही खेलों को शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए। किताबों का बोझ कम करके व्यावहारिक ज्ञान को ज्यादा तवज्जो दी जानी चाहिए

निधि खण्डेलवाल, प्रिंसिपल नवीन स्कूल

आंगनबाड़ी प्रारंभिक शिक्षा के अच्छे केंद्र साबित हो सकते हैं। बशर्तें वहां अच्छी सुविधाएं दी जाएं। पढ़ाई की इन्हीं केंद्रों से होती है। शिक्षा के क्षेत्र में बजट की समस्या दूर होनी चाहिए। शिक्षकों के रिक्त पद समय पर भरें जाएं।

संतोष यादव, उप प्रधानाचार्य नवीन स्कूल

घर की नींव की तरह ही बच्चों की नींव पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि वे आगे चलकर घर-परिवार के साथ देश का नाम करें। लेकिन इसके लिए अच्छी शिक्षा जरूरी है और यह तभी मिल सकती है जब स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बेहतर हो।

रुचि जैन, शिक्षिका

कॉमर्स में बच्चों का रुझान कम हुआ है। इसके प्रचार-प्रसार और पाठ्यक्रम में बदलाव करे बेहतर बनाया जा सकता है। अलवर में लगातार उद्योग पनप रहे हैं, ऐसे में कॉमर्स विषय के विद्यार्थियों को रोजगार में ज्यादा लाभ मिलेगा।

शिवराज डाकोत, व्याख्याता

उच्च शिक्षा में बदलाव की जरूरत है। कॉलेज और विश्वविद्यालय खोलने के साथ ही उनमें शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार की जरूरत है। विद्यार्थियों को भी शिक्षा के प्रति जागरूक रहना होगा। खासकर कॉलेज के छात्र-छात्राओं को कक्षाओं में ज्यादा से ज्यादा उपस्थित रहने की जरूरत है।

प्रेमसिंह, प्रोफेसर

बच्चों को स्कूल में प्रवेश की उम्र 6 साल होने से नामांकन घटा है। इसमें संशोधन की जरूरत है। विषयों का चुनाव पहले की तरह 9वीं कक्षा में होना चाहिए। ताकि कॉलेज जाने तक बच्चा संबंधित विषय में दक्ष हो जाए।

विजयलक्ष्मी शर्मा, शिक्षिका