वैराग्य पथ की तरफ अग्रसर हो रहे चार दीक्षार्थियों की अलवर में बिनौली यात्रा निकली। स्कीम नं.10 स्थित जैन भवन में विराजमान मुनि साक्ष्य सागर ससंघ का आशीर्वाद ग्रहण करने के बाद चारों दीक्षार्थी नगर भ्रमण को निकले। इससे पहले सुबह दीक्षार्थियों को आहारचर्या के लिए ले जाया गया। दीक्षार्थी बाल ब्रह्मचारी अंकुर नागौर, मंयक गोदिया महाराष्ट्र, ब्रह्मचारी गणेशी लाल गुनोर मध्यप्रदेश व यशवंत रामगढ़ डूंगरपुर राजस्थान को दिगम्बर जैनाचार्य विशुद्ध सागर की ओर से शीघ्र ही दीक्षा प्रदान की जाएगी, जिसके पहले यह कार्यक्रम हो रहा है।
शोभायात्रा के साथ बिनौली यात्रा के मार्ग में पडऩे वाले जैन धर्मावलम्बियों के घरों के आगे रंगोली सजाई गई तथा दीक्षार्थियों का स्वागत किया। श्रद्धालुजन भजन आदि गाते हुए चल रहे थे। अक्षय भैया के निर्देशन में हुई इस कार्यक्रम में अलवर सहित बाहर के जैन धर्मावलम्बी भी शामिल हुए। इस दौरान सभी दीक्षार्थी उत्साहित नजर आ रहे थे और वे उन पलों का इंतजार करते नजर आए जब उन्हें गुरु आचार्य विशुद्ध सागर के हाथों दीक्षा मिलेगी।
दीक्षार्थी मयंक महाराष्ट्र ने बताया कि बीकॉम, एमकॉम और एमबीए करने के बाद वो दीक्षा ले रहे हैं। परिवार में इससे पहले कभी किसी ने दीक्षा नहीं ली और मुझे वैराग्य की ओर जाने का अवसर मिला है इस मार्ग पर जाने से मोक्ष् की प्राप्ति होती है।
नागौर के अंकुर ने बताया कि बीकॉम, एमकॉम व सीए कंपनी सेकेटरी की शिक्षा ली है। मेरा फैमिली बिजनेस भी है लेकिन इन सबको छोडकर दीक्षा ले रहा हुुं। ये मेरे बचपन के संस्कार व पूर्व जन्म के पुण्य है जो इस मार्ग मिल रहा है।
मध्यप्रदेश के गणेशी लाल ने बताया कि मेरी उम्र 72 साल है। मेरे मामा पक्ष में जैन मुनि हुए हैं। उन्हीं के पद चिंन्हों पर जैन धर्म में दीक्षा लेने का विचार आया ताकि उनकी तरह मेरा भी आत्म कल्याण हो और जीवन से मुक्ति मिले।
डूंगरपुर के यशवंत ने बताया कि जैन मुनि के सानिध्य में दीक्षा लेने का भाव आया ताकि मैं भी उनकी तरह जीवन में आत्म कल्याण कर सकूं। मेरे परिवार में पहले भी दीक्षा ले चुके हैं।
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