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देखिए… कैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का परिवार गुमनामी के अंधेरे में गुजार रहा जीवन
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देखिए… कैसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का परिवार गुमनामी के अंधेरे में गुजार रहा जीवन

पूरा देश आज आजादी का 78वीं वर्षगांठ मनाएगा। देश की आजादी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने योगदान दिया। कुछ ने बलिदान भी दे दिया। आज भी इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
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Freedom Fighters पूरा देश आज आजादी का 78वीं वर्षगांठ मनाएगा। देश की आजादी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने योगदान दिया। कुछ ने बलिदान भी दे दिया। आज भी इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। हम बात कर रहे हैं जिले के ग्राम निपानी की। इस गांव में सात स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं। देश को आजाद कराने अंग्रेजों का जुल्म सहा। आज भी ये गुमनामी के अंधेरे में है। हर साल की तरह इस बार भी देश जश्न में डूबा रहेगा। जब अविभाजित दुर्ग जिला था, तब इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को राष्ट्रीय पर्व पर आमंत्रित किया जाता था और सम्मान भी करते थे, लेकिन जब से बालोद जिला बना, तब से इन सेनानियों व इनके परिवार की सुध लेना तो दूर जिला प्रशासन राष्ट्रीय पर्व के आयोजनों में इन्हें आमंत्रण तक नहीं देते। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंदूलाल चंद्राकर व सात अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के कारण गांव को गौरव ग्राम का दर्जा भी दिया गया, लेकिन इस गांव के ही सेनानी आज गुमनाम हो गए है।