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LAC के पास चीन ने चली नई चाल, बिछा रहा शिनजियांग-तिब्बत रेललाइन

चीन एक बेहद महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने जा रहा है — एक रेलवे लाइन जो शिनजियांग से तिब्बत तक जाएगी। यह लाइन भारत-चीन सीमा यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास से गुजरेगी, और संभव है कि यह अक्साई चिन जैसे विवादित इलाके को भी पार करेगी। यही कारण है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत में रणनीतिक चिंता बढ़ने की आशंका है।

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Pankaj Meghwal

Aug 12, 2025

चीन एक बेहद महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने जा रहा है — एक रेलवे लाइन जो शिनजियांग से तिब्बत तक जाएगी। यह लाइन भारत-चीन सीमा यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास से गुजरेगी, और संभव है कि यह अक्साई चिन जैसे विवादित इलाके को भी पार करेगी। यही कारण है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत में रणनीतिक चिंता बढ़ने की आशंका है।

इस नई रेललाइन का नाम है — शिनजियांग-तिब्बत रेलवे, जो शिनजियांग के होतान शहर से तिब्बत के शिगात्से तक पहुंचेगी। शिगात्से पहले से ही ल्हासा-शिगात्से लाइन से जुड़ा हुआ है। जब यह प्रोजेक्ट पूरा होगा, तो यह उत्तर-पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी चीन को आपस में जोड़ने के लिए लगभग 2000 किलोमीटर लंबा एक रणनीतिक कॉरिडोर तैयार करेगा। रेलवे लाइन का पहला हिस्सा शिगात्से से पाखुक्तसो तक जाएगा, जो रुतोग से होकर गुजरेगा और पैंगोंग झील के पास से होकर निकलेगा — यानी एलएसी के बेहद करीब। इसमें से एक हिस्सा अक्साई चिन से भी गुजर सकता है, जिसे भारत और चीन दोनों अपना इलाका बताते हैं। चीन की योजना है कि साल 2035 तक ल्हासा को ध्यान में रखते हुए लगभग 5000 किलोमीटर का हाई-एल्टीट्यूड रेल नेटवर्क तैयार कर लिया जाए।

ये रेल लाइन बहुत ऊंचाई वाले और बेहद कठिन इलाकों से होकर गुजरेगी, इसकी औसत ऊंचाई करीब 4500 मीटर होगी। रास्ते में कुनलुन, काराकोरम, कैलाश और हिमालय की पर्वतमालाएं आएंगी। साथ ही, बर्फीली नदियां, ग्लेशियर और परमानेंट फ्रोस्ट वाले इलाके भी पार करने होंगे, जो इंजीनियरिंग के लिहाज़ से एक बड़ी चुनौती हैं।

बता दें कि फिलहाल चीन के पास तिब्बत को जोड़ने वाली तीन रेलवे लाइनें हैं- चिंगहाई-तिब्बत रेलवे, ल्हासा-शिगात्से रेलवे, ल्हासा-न्यिंगची रेलवे, जो अरुणाचल प्रदेश के करीब से गुजरती है। शिनजियांग-तिब्बत रेलवे की योजना सबसे पहले साल 2008 में बनाई गई थी। तब इसे चीन की लॉन्ग टर्म रेलवे नेटवर्क योजना में शामिल किया गया था। इसका मकसद तिब्बत की राजधानी ल्हासा को शिनजियांग के अलावा पूर्व में युन्नान और चेंगदू से भी जोड़ना है।

अब भारत के नजरिए से बात करें तो सबसे ज्यादा चिंता इस बात को लेकर है कि ये रेललाइन अक्साई चिन से होकर गुजर सकती है। चीन इस इलाके को शिनजियांग का हिस्सा बताता रहा है, लेकिन अक्साई चिन लद्दाख का अहम हिस्सा है, जिस पर चीन ने 1950 के दशक में कब्जा कर लिया था। 1962 की भारत-चीन जंग की एक वजह यही इलाका था जिसमें चीन ने G219 हाईवे भी बनाई थी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये रेलवे लाइन अक्साई चिन से होकर गुजरती है, तो चीन अपनी सेना और सामान को एलएसी के करीब बहुत तेजी से पहुंचा सकता है — जो भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और चीन के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं। 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक बातचीत लगातार चल रही है। इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने चीन के तिआनजिन में होने वाले शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट में शामिल हो सकते हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी हो सकती है। ऐसे में ये बैठक दोनों देशों के रिश्तों में एक नया मोड़ ला सकती है।