छिंदवाड़ा/मोहखेड़/ सगे-रिश्तेदारों की विदाई पर परिजन का रोना तो आम है, लेकिन एक पराए व्यक्ति की विदाई पर पूरा गांव फूट-फूटकर रोए ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है। यह मामला और भी संवेदनाओं से भरा हो जाता है जब वह व्यक्ति एक शिक्षक हो।
मंच की ओर बढ़ रहे हर एक कदम पर फूलों की बारिश, दोनों ओर विद्यार्थियों व ग्रामीणों की कतार, हर आंख नम… यह दृश्य था एक शिक्षक के विदाई समारोह का, जिसका हाल ही में स्थानांतरण हुआ है।
आज के दौर में जहां आमतौर पर एक शिक्षक की भूमिका विद्यालय की चारदीवारी तक ही सीमित है वहीं इस शिक्षक ने अपनी मेहतन और लगन से न सिर्फ विद्यार्थियों को शिक्षित किया, बल्कि उनके अंदर छिपी प्रतिभा को निखारा, उनके हुनर को मंच दिलवाने के लिए दिन-रात एक कर दिए। पूरे गांव में विकास की नई इबारत लिख दी। न सिर्फ विद्यार्थियों को बल्कि अभिभावकों को भी जागरूक किया। यही वजह है कि जब उन्हें विदाई दी जा रही थी तो गांव का कोई भी व्यक्ति अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाया और रोते हुए अपने आंसुओं से उनके प्रति स्नेह को व्यक्त करता रहा। दरअसल, मोहखेड़ विकासखंड से पंद्रह किलोमीटर दूर स्थित है शासकीय हाई स्कूल देवगढ़। यहां बीते छह वर्षों से पदस्थ प्रभारी प्राचार्य सुरेश जजावरा ने क्या बच्चे, क्या बूढ़े… सभी का दिल जीत लिया। इन्हीं की बदौलत आदिवासी बच्चों ने शिक्षा के साथ-साथ खेलना सीखा और अपने गांव देवगढ़ का नाम प्रदेशस्तर पर रोशन किया।
हालही में जजावरा का स्थानांतरण उनके गृह जिला मंदसौर हो गया। बुधवार को जब शासकीय स्कूल परिसर में उनकी विदाई का समारोह आयोजित किया गया तो बच्चों के साथ-साथ अभिभावक भी फूट-फूटकर रो पड़े।
जजावरा ने पत्रिका को बताया कि मुझे यहां बच्चों और ग्रामीणों से बहुत प्यार मिला। ग्रामीणों के सहयोग से ही स्कूल और बच्चों के विकास के लिए कई कार्य किए।