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हुबली

सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की अनदेखी

वर्तमान में चिकित्सा महंगी होती जा रही है। हर कहीं निजी अस्पतालों की भरमार है। निजी अस्पताल मामूली स्वास्थ्य जांच के लिए भी सैकड़ों रुपए फीज वसूलते हैं। ऐसे में गरीबों, मजदूरों के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र किसी संजीविनी से कम नहीं हैं।

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स्वास्थ्य केंद्र के आस पास लोगों का अतिक्रमण
हुब्बल्ली. वर्तमान में चिकित्सा महंगी होती जा रही है। हर कहीं निजी अस्पतालों की भरमार है। निजी अस्पताल मामूली स्वास्थ्य जांच के लिए भी सैकड़ों रुपए फीज वसूलते हैं। ऐसे में गरीबों, मजदूरों के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्र किसी संजीविनी से कम नहीं हैं।

सरकार की ओर से गरीबों, मजदूरों के लिए गांवों, गलियों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं। स्थानीय निकायों की ओर से भी स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए हैं। आम जनता सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने से कतराती है।

आमतौर पर सरकारी अस्पताल मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करते हैं। अधिकतर सरकारी अस्पतालों में साफसफाई नहीं रहती। चिकितस्कों की कमी, चिकित्सा कर्मियों की कमी, मरीजों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें आम है।

शहर के गणेशपेट स्थित हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में साफ-सफाई बेहतर है। मरीजों के साथ अच्छा बर्ताव भी किया जा रहा है। चिकित्सक और चिकित्सा कर्मी मरीजों के साथ अच्छा बर्ताव करते हैं परन्तु अस्पताल का बाहरी परिसर अतिक्रमण का शिकार हुआ है।

सभी सेवाएं नि:शुल्क

स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉ. सतीश ने पत्रिका से बातचीत करते हुए कहा कि प्रतिदिन ओपीडी में 50 से 60 मरीजी आते हैं। स्वास्थ्य जांच, दवाई, रक्त जांच, मूत्र जांच समेत सभी प्रकार की जांच नि:शुल्क की जाती हैं। दवाईयां भी नि:शुल्क दी जाती हैं।

चिकित्सा अधिकारी का पद रिक्त

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा अधिकारी का पद रिक्त है। स्वास्थ्य केंद्र में कुल दो चिकित्सक हैं जो बाहरी संविदा के आधार पर हैं। वे भी बाहरी संविधा के आधार पर नियुक्त हैं। अस्पताल में इलाज के लिए आई वृध्दा देवक्का ने कहा कि अस्पताल में केवल दस रुपए की पर्ची लेनी पड़ती है। सभी प्रकार की जांच, दवाई सब नि:शुल्क है। चिकित्सक तथा चिकित्सा कर्मी अच्छे से बर्ताव करते हैं।

स्वास्थ्य केन्द्र के हालात

स्वास्थ्य केंद्र के आसपास मकान हैं। यहां के लोग इसकी अनदेखी कर रहे हैं। अस्पताल के आसपास के लोग अतिक्रमण किए हुए हैं। अस्पताल में बकरियां घुस आती हैं, बच्चे साइकिल चलाते हुए अस्पताल में घुस आते हैं। इन्हें रोकने वाला-टोकने वाला कोई नहीं है। अस्पताल के आसपास के लोग अस्पताल की खिड़कियों पर रस्सी बांधकर कपड़े सुखाते हैं। अस्पताल की दीवार से लगे सामानों को रखा है। बकरियों का बांधा हुआ है।

स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा कर्मियों ने पत्रिका से कहा कि आसपास के लोग चूल्हा लगाते हैं तो धूआं अस्पताल में आ जता है। इससे अस्पताल में बैठना बहुत मुश्किल होता है। बच्चे साइकिल चलाते हुए अस्पताल में घुस आते हैं, इन्हें डांटने पर लोग झडऩे को आते हैं। बकरियां अस्पताल में घुस आती हैं। आसपास के लोगों को स्वास्थ्य केंद्र के आसपास सफाई रखने पर ध्यान देना चाहिए। अस्पताल भवन पुराना है इसके नवीनीकरण की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि छह चिकित्सा सहायक कर्मी इनसोर्स के हैं और पांच बाहरी संविदा पर कार्यरत हैं। बाहरी संविदा कर्मियों को पीएफ, ईएसआई समेत कोई भी सुविधा नहीं है। दो-तीन माह में एक बार वेतन दिया जाता है।