जयपुर। इस पुरुष दिवस पर हम आपको एक पिता से मिलवाते हैं। वो हैं कविवर हरिवंश राय बच्चन। वो बड़े कवि थे, जब अपने बेटे का विरोध का सामना किया तो भी एक कविता लिख डाली। इस कविता के जरिए उन्होंने अपने बेटे के सवाल का जवाब दिया, जब अमिताभ ने उनसे झल्लाकर पूछा था कि उन्होंने उन्हें पैदा क्यों किया। सुनिए कविता…
ज़िन्दगी और ज़माने की
कशमकश से घबराकर
मेरे बेटे मुझसे पूछते हैं कि
हमें पैदा क्यों किया था?
और मेरे पास इसके सिवाय
कोई जवाब नहीं है कि
मेरे बाप ने मुझसे बिना पूछे
मुझे क्यों पैदा किया था?
और मेरे बाप को उनके
बाप ने बिना पूछे उन्हें और
उनके बाबा को बिना पूछे उनके
बाप ने उन्हें क्यों पैदा किया था?
ज़िन्दगी और ज़माने की
कशमकश पहले भी थी,
आज भी है शायद ज्यादा…
कल भी होगी, शायद और ज्यादा…
तुम ही नई लीक रखना,
अपने बेटों से पूछकर
उन्हें पैदा करना…
‘नई लीक’ शीर्षक की यह कविता उन्होंने तब लिखी जब उनके बेटे अमिताभ बच्चन ने नौकरी न मिलने और जिंदगी की उलझनों से परेशान आकर अपने पिता से सवाल कर दिया कि उन्होंने उन्हें पैदा ही क्यों किया। इस सवाल पर हरिवंश राय बच्चन ने बस इतना भर कहा कि ‘मैंने ये सवाल कभी अपने पिता से नहीं पूछा।’ उस समय अमिताभ लौट गए। उन्हें रातभर इस बात का पछतावा भी रहा कि उन्होंने अपने बाबूजी के सामने उंची आवाज में बात की। सुबह उठकर उनसे माफी मांगने का खुद से वादा कर वे सो गए। सुबह जब अमिताभ बच्चन उठे तो उन्हें अपने बिस्तर में एक कागज मिला। जिस पर उनके पिता हरिवंश राय बच्चन के हाथ से लिखी कविता थी, जिसका शीर्षक ‘नई लीक’ था। जब अमिताभ ने यह कविता पढ़ी तो उनकी आंखों से आंसू आ गए और वे अपने बाबूजी से माफी मांगने उनके सामने सिर झुकाकर खड़े हो गए। अब वे कई मौकों पर पिता से किए इस सवाल का जिक्र करते हुए अफसोस जाहिर करते हैं। जबकि एक समय वो भी था जब अमिताभ अपने कॅरियर में पिता के सरनेम ‘बच्चन’ को अपने लिए मुश्किलें पैदा करने वाला मानते थे और एक समय वो भी आया, जब पिता से बढ़कर कोई आदर्श उनके सामने नहीं। किसी दौर में खुद बच्चन सरनेम का इस्तेमाल करने से उन्होंने गुरेज किया था, ताकि उनके पिता हरिवंश राय बच्चन की लीगेसी उनके आड़े न आए और आज उसी सरनेम से वे जाने जाते हैं।
अमिताभ कहते हैं कि जवानी के दिनों में मैं जहां भी काम मांगने जाता, वो हरिवंश राय बच्चन की संतान होने के नाते कोई भी छोटा काम देते कतराते और साफ मना कर देते। ऐसे में मैं अपनी बेरोजगारी को लेकर परेशान था। लगता था कि कहीं मेरा कॅरियर पिता के इतनी बड़ी प्रसिद्धी के पीछे बौना न हो जाए। लेकिन पिता होना क्या होता है, यह मैंने पिता होकर जाना।
अमिताभ बच्चन का पुराना घर ‘प्रतीक्षा’ जहां वे अपने पिता हरिवंश राय बच्चन और मां तेजी बच्चन के साथ रहे, आज भी वह उनके पिता की याद दिलाता है। अमिताभ बताते हैं कि बाबूजी की कुर्सी आज भी उसी जगह रखी है, जहां वे बैठा करते। उस घर को पिता की यादगार मानते हुए अमिताभी ने एक लाइब्रेरी भी यहां बनवाई है, जिसमें हरिवंश राय बच्चन की हर रचना मौजूद है, साथ ही वह खत और कविता भी जो उनके पिता ने उनके लिए लिखी थी। जब उनसे पूछा गया कि इस लाइब्रेरी में आग लग जाए तो वह वहां से कौनसी रचना बचाएंगे, इस पर अमिताभ का जवाब होता है कि वह बच्चन रचनावली को बचाएंगे।