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Video: घर, दफ्तर और चौपाल से आगे बढ़ा चाय का नया सामाजिक प्रभाव
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Video: घर, दफ्तर और चौपाल से आगे बढ़ा चाय का नया सामाजिक प्रभाव

चाय अब पेय पदार्थ से आगे बढकऱ देश की सामाजिक संरचना, रोजगार व्यवस्था और बदलती उपभोक्ता संस्कृति का मजबूत संकेतक बन चुकी है।
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

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Updated: 20 May 2026, 9:16 PM IST

चाय अब पेय पदार्थ से आगे बढकऱ देश की सामाजिक संरचना, रोजगार व्यवस्था और बदलती उपभोक्ता संस्कृति का मजबूत संकेतक बन चुकी है। अनुमानित रूप से देश में प्रतिदिन करीब 90 करोड़ कप चाय की खपत एक ऐसे विशाल नेटवर्क को सक्रिय रखती है, जो खेतों से लेकर छोटे विक्रेताओं और बड़े ब्रांडों तक फैला हुआ है। सुबह की शुरुआत से लेकर देर रात तक चाय अब केवल थकान दूर करने का माध्यम नहीं, बल्कि बातचीत, नेटवर्किंग और निर्णयों का साझा मंच बनती दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है और देश में उत्पादित लगभग 80 प्रतिशत चाय घरेलू बाजार में ही उपयोग होती है। यही वजह है कि भारतीय चाय बाजार उत्पादन आधारित मॉडल से अधिक उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था का उदाहरण बन गया है। बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक इसकी मांग लगातार स्थिर बनी हुई है।

चाय बाजार में उभरा नया उपभोक्ता व्यवहार

बीते कुछ वर्षों में चाय बाजार में एक नया उपभोक्ता व्यवहार उभरा है। पहले जहां दूध वाली पारंपरिक चाय की प्रमुख हिस्सेदारी थी, वहीं अब युवा वर्ग नए स्वाद और स्वास्थ्य आधारित विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। ग्रीन टी, हर्बल टी, लेमन टी, इंस्टेंट टी और फ्लेवर मिश्रित उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। एक समय सडक़ किनारे दिखाई देने वाले छोटे चाय स्टॉल अब स्थानीय आर्थिक इकाई की भूमिका निभा रहे हैं। शहरों में स्टार्टअप चर्चा, राजनीतिक बातचीत, नौकरी से जुड़ी जानकारी और छोटे कारोबारी निर्णयों का केंद्र भी चाय स्टॉल बनते जा रहे हैं। कम निवेश में शुरू होने वाला यह व्यवसाय लाखों लोगों के लिए आजीविका का बड़ा विकल्प बना हुआ है।