जोधपुर. इस साल आए पश्चिमी विक्षोभों ने राजस्थान में रेगिस्तान के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को मात दे दी। बीते तीन महीनाें में 17 पश्चिमी विक्षोभ आए। लगातार आए विक्षोभों ने वातावरण में नमी का स्तर (आपेक्षिक आर्द्रता) 50 प्रतिशत से ऊपर रखा। अंधड़ और धूल भरी हवाएं भी खूब चली लेकिन नमी के कारण पीछे-पीछे चल रहे बादलों ने बरसात के रूप में धूल कणों को जमीन पर बैठाए रखा। यही कारण है कि मार्च, अप्रेल और मई में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 100 के आसपास अथवा इसके नीचे रहा। बीते 6 साल के डाटा देखें तो कोराना काल 2020 को छोड़कर जोधपुर में इन दिनों भयंकर प्रदूषण रहता था। वर्ष 2018 में 300 के पास रहा, जबकि 2019 में 200 से 250 रिकॉर्ड हुआ।
नमी होने से बालू आगे नहीं बढ़ी
मार्च से लेकर अब तक लगातार नमी बनी रही। उच्च दबाव का क्षेत्र बनने से बालू ऊपर तो उठी लेकिन जल कणों के साथ संघनित होकर वापस नीचे आ गई। बीते सालों नमी कम होने से बादल तो बनते थे लेकिन संघनन की प्रक्रिया नहीं पाती थी। नतीजन् आंधी आगे बढ़ती रहती और पश्चिमी राजस्थान से पूर्वी राजस्थान में पहुंचकर आबोहवा खराब कर देती।
जोधपुर सर्वाधिक प्रदूषित शहर, लेकिन इस साल सुकुन भरा अहसास
– वर्ष 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में विश्व के सौ सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में राजस्थान के चार शहर शामिल थे। सर्वाधिक प्रदूषित जोधपुर 30वें नम्बर पर, जयपुर 33, कोटा 58, उदयपुर 59 पर था।
– वर्ष 2019 में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सर्वे में देश में 100 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में राजस्थान का सबसे प्रदूषित शहर जोधपुर था। पूरे देश में 14वें स्थान पर आया।
– वर्ष 2020 की विश्व एयर क्वालिटी रिपोर्ट में प्रदेश का सर्वाधिक प्रदूषित शहर जोधपुर था। पूरे विश्व में 35वी रैंक मिली।
जोधपुर में जून के प्रथम सप्ताह का एक्यूआई
दिन——– एक्यूआई
1 जून ——– 65
2 जून ——– 66
3 जून ——– 111
4 जून ——– 112
5 जून ——– 95
6 जून ——– 99
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जोधपुर: बीते 6 साल में इस साल की गर्मियों में सर्वाधिक सुकुन
वर्ष ———–6 जून ——– 6 मई ——– 6 अप्रेल
2023 ——– 99 ——– 91 ——– 136
2022——– 196 ——– 205——– 155
2021——– 83 ——– 221 ——– 219
2020 ——– 105——– 91 ——– 124
2019 ——– 217 ——– 244——– 208
2018 ——– 302 ——–287 ——– 317
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इस साल गर्मियों में तुलनात्मक रूप से नमी अधिक रही। इससे धूल कणों से अधिक वायु प्रदूषण नहीं रहा। आबोहवा साफ रहने के साथ विजिबिलिटी भी बेहतर रही।
हिमांशु शर्मा, वैज्ञानिक, भारतीय मौसम विभाग जयपुर