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 Shahadat Ko Salam:  शहादत पर गर्व के साथ छह साल से वीरांगना को नौकरी का इंतजार

शहादत और सम्मान की बात आते ही झुंझुनूं का नाम सबसे आगे लिया जाता है। हर गांव किसी न किसी बलिदान की कहानी कहता है। वीरांगनाएं गर्व के साथ कहती हैं ‘मेरे पति ने देश के लिए प्राण दिए हैं।’

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खेतड़ी (झुंझुनूं)। शहादत और सम्मान की बात आते ही झुंझुनूं का नाम सबसे आगे लिया जाता है। हर गांव किसी न किसी बलिदान की कहानी कहता है। वीरांगनाएं गर्व के साथ कहती हैं ‘मेरे पति ने देश के लिए प्राण दिए हैं।’ वहीं पिता की शहादत के किस्से सुनकर बच्चों का सीना गर्व से भर जाता है और वे भी पापा की तरह सेना में जाने का सपना संजोते हैं। पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड कामरान गाजी को ढेर करने वाले शहीद हवलदार श्योराम गुर्जर का परिवार भी उसी परंपरा का हिस्सा है, लेकिन शहादत के छह साल बाद भी वीरांगना सुनीता देवी को उनका हक नहीं मिल पाया, वह आज भी अनुकंपा नियुक्ति की राह देख रही हैं। देखिए खास रिपोर्ट….

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