
जोधपुर की जेल में सजा काट रहे अपने ही गुरुकुल की नाबालिग से यौन दुराचार के आरोपी आसाराम मामले में सह अभियुक्त संचिता उर्फ शिल्पी की ओर से सजा स्थगन व जमानत आवेदन के लिए दायर याचिका पर सोमवार को जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ में सुनवाई अधूरी रही। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोड़ा व उनके सहयोगी निशांत बोड़ा ने बहस शुरू की। उन्होने शिल्पी के पक्ष में पैरवी करते हुए चालान व सजा के आदेश में अंकित आईपीसी की धाराओं की व्याख्या करते हुए याचिकाकर्ता को दी गई सजा को चुनौती दी। वहीं शिल्पी के साथ हुए आसाराम, पीडि़ता व उनके परिजनों के साथ हुए मोबाइल व लैंडलाइन फोन पर बातचीत का टैक्स्ट रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होने पर भी आपत्ति जताई। समयाभाव के कारण सोमवार को भी सुनवाई अधूरी रही। अब इस मामले में बारह सितम्बर को आगे की सुनवाई होगी।
एससी एसटी कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा ने गौरतलब है कि यौन उत्पीडऩ के मामले में 25 अप्रेल 2018 को शिल्पी व शरद को २०-२० साल की सजा देने के आदेश दिए थे। वहीं आसाराम को आजीवन कारावास की सजा देने के आदेश दिए गए थे। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवकुमार व्यास व पीडि़ता की ओर से पीसी सोलंकी मौजूद रहे।