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सात दिन की कठिन परिक्रमा के बाद थमा मारवाड़ का कुंभ, 2021 में फिर होगा आस्था का सफर
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सात दिन की कठिन परिक्रमा के बाद थमा मारवाड़ का कुंभ, 2021 में फिर होगा आस्था का सफर

उम्मेद भवन पैलेस में पूर्व राजपरिवार के सदस्यों ने किया सभी यात्रियों की आस्था को नमन  
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जोधपुर . पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के उपलक्ष्य में आयोजित भोगिशैल परिक्रमा में शामिल हजारों श्रद्धालुओं के आस्था का कारवां बुधवार को थम गया। परिक्रमा के अंतिम पड़ाव स्थल मंडोर से हजारों श्रद्धालुओं का हुजूम प्रस्थान कर कृषि मंडी, संतोषी माता मंदिर , कागा तीर्थ शीतला माता मंदिर, शेखावतजी का तालाब हनुमान मंदिर, उम्मेद भवन होते हुए रातानाडा गणेश मंदिर पहुंचा। रंगबिरंगे परिधानों में मारवाड़, गोड़वाड़ व जोधपुर के ग्रामीण अंचल से हजारों श्रद्धालुओं ने जोधपुर के चारों तरफ की नाग पहाडिय़ों में स्थित पौराणिक महत्व के धार्मिक स्थलों के दर्शन किए। करीब 110 किमी लंबी सात दिवसीय भोगिशैल यात्रा निर्विघ्न पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने गणेश मंदिर में पूजन व शीश नवाकर आभार जताया।

 

अब साल 2021 में फिर आस्था का सफर शुरू होगा। रातानाडा गणेश मंदिर से हरिनाम संकीर्तन व मंगल गीत गाते हुए श्रद्धा का कारवां रातानाडा स्थित माहेश्वरी भवन में पहुंचा। माहेश्वरी समाज की ओर से पूरे वातानुकूलित भवन को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। कुछ देर विश्राम के बाद विसर्जन यात्रा मोहनपुरा पुलिया, नई सड़क, सिरे बाजार कुंजबिहारी मंदिर होते हुए जूनी धान मंडी स्थित गंगश्यामजी मंदिर पहुंची। मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना व घंटाघर में ध्वज पहुंचने के साथ परिक्रमा यात्रा का विसर्जन किया गया।

उम्मेद भवन में आस्था को किया नमन

बुधवार सुबह मंडोर व आस-पास के विश्राम स्थलों से रवाना होकर परम्परागत मार्ग से होते हुए उम्मेद भवन पैलेस पहुंचने पर पूर्व सांसद गजसिंह, हेमलता राज्ये व सैनाचार्य अचलानंदगिरि ने श्रद्धालुओं के हाल-चाल पूछे और राजघराने के प्रति उनकी आस्था को नमन किया। राजघराने के सदस्यों से मिलने और उन्हें नजदीक से देखने के लिए श्रद्धालु कतार में खड़े रहे। अल सुबह से श्रद्धालुओं के उम्मेद भवन पहुंचने का सिलसिला करीब चार घंटे तक जारी रहा।