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खुलासे के बाद सरकारी डाक्टर्स अब अस्पताल में नहीं लिख रहे ब्रांडेड दवा
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खुलासे के बाद सरकारी डाक्टर्स अब अस्पताल में नहीं लिख रहे ब्रांडेड दवा

जोधपुर.जोधपुर में मेडिकल कॉलेज से जुड़े सरकारी डॉक्टर्स अब प्रेस्क्रिप्शन की पर्ची के साथ कागज की छोटी पर्ची पर ब्रांडेड दवा लिखने से राजस्थान पत्रिका में खुलासे के बाद तौबा कर ली है।      
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जोधपुर

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MI Zahir

Oct 16, 2018

जोधपुर.राजस्थान पत्रिका में खुलासे के बाद जोधपुर में मेडिकल कॉलेज से जुड़े सरकारी डॉक्टर्स अब प्रेस्क्रिप्शन की पर्ची के साथ कागज की छोटी पर्ची पर ब्रांडेड दवा लिखने से तौबा कर ली है। राजस्थान पत्रिका में खुलासे के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में अब चिकित्सकों ने परामर्श पर्ची के साथ कागज की छोटी पर्ची पर ब्रांडेंड दवा लिखने से तौबा कर ली है। ओपीडी में परामर्श लेने के बाद नि:शुल्क व सहकारी उपभोक्ता भंडार की दवा दुकानों पर मरीज केवल जेनेरिक नाम लिखी परामर्श पर्ची लेकर आ रहे हैं।

साल्ट नेम से मिलती है दवा
सरकारी अस्पतालों में कुछ चिकित्सकों की ओर से जैनेरिक के बजाय ब्रांडेड दवा लिखने के मामले का राजस्थान पत्रिका ने खुलासा किया था। पत्रिका ने 12 अक्टूबर के अंक में ‘अस्पतालों में चिकित्सक लिख रहे ब्रांडेड दवाएंÓ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज के अधीन एमडीएम, एमजीएच एवं उम्मेद अस्पताल में कई चिकित्सक परामर्श पर्ची के अलावा मरीज को एक छोटी पर्ची पर दवा का ब्रांड नेम लिखकर दे रहे हैं। ऐसी दवाएं नि:शुल्क काउंटर, प्रधानमंत्री जनऔषधि केन्द्र व सहकारी दवा दुकानों पर साल्ट नेम से मिलती है, लेकिन ब्रांड नेम से दवा लिख देने से मरीजों को बाहर की दुकानों से महंगी दवा खरीदनी पड़ रही है।

सख्त हिदायत दी
समाचार प्रकाशन के बाद मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एस.एस. राठौड़ ने सभी अस्पताल अधीक्षकों व प्रभारियों को सख्त हिदायत दी कि उनके यहां इस तरह की शिकायत नहीं आनी चाहिए। ऐसे चिकित्सकों को पाबंद किया जाएं कि अस्पताल में परामर्श के समय मरीज को केवल जैनेरिक नाम की दवा ही लिखें।

परामर्श पर्ची ही थी
पत्रिका ने एक बार फिर नि:शुल्क दवा काउंटरों व सहकारी उपभोक्ता भंडार की दवा दुकानों पर काफी देर तक पड़ताल की। यहां पर जो मरीज आ रहे थे, उनके हाथ में केवल परामर्श पर्ची ही थी और जिस पर जैनेरिक दवाइयां ही लिखी गई थीं।