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आईआईटी ने बनाया मटका, फ्लोराइड मुक्त हो गया पानी
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आईआईटी ने बनाया मटका, फ्लोराइड मुक्त हो गया पानी

IIT Jodhpur - आम आदमी सीधा उपयोग में ले सकेंगे, बालू, बांवळिया और हाइड्रोक्सीएपेटाइट से बना है मटका
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जोधपुर. केंद्र सरकार ने 10 साल पहले जिस उद्देश्य से थार मरुस्थल के प्रवेश द्वार जोधपुर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की स्थापना की थी, अब उसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। आईआईटी जोधपुर से प्रदेश में खारे पानी विशेषकर फ्लोराइड युक्त पानी से निजात दिलाने की तकनीक खोज निकाली है।
आईआईटी ने एक ऐसा मटका बनाया है। जिससे पानी के सभी कठोर लवण छनकर नीचे साफ पानी उपलब्ध होता है। विशेष बात यह है यह तकनीक प्रदेश में व्यर्थ समझी जाने वाली बालू मिट्टी और खरपतवार बने बांवळिया (विलायती बबूल) से विकसित है। आईआईटी की यह खोज ग्रामीण परिवेश को सीधा फायदा पहुंचाएगी। मटके आसानी से व सस्ते दामों पर खरीदकर गांव-ढाणियों में उपयोग में लिए जा सकेंगे। फ्लोराइड युक्त पानी से ग्रस्त नागौर पट्टी, शेखावटी व सिरोही के क्षेत्रवासियों के लिए यह खोज वरदान से कम नहीं है। नागौर के इतिहास से कूबड़ पट्टी का श्राप भी हट जाएगा।


ऐसा बना है मटका

आईआईटी के रसायन विज्ञान विभाग के डॉ. राकेश शर्मा ने बताया कि फ्लोराड युक्त पानी से दांत व हड्डियां टेढ़ी हो जाती है। दांत व हड्डी में कठोर पदार्थ हाइड्रोक्सीएपेटाइट पाया जाता है। प्रयोगशाला में हाइड्रोक्सीएपेटाइट को संश्लेषित (निर्माण) किया गया। नैनो स्तर पर इस रसायन को बालू मिट्टी की गैलेरी में प्रवेश कराया गया। बालू मिट्टी के कणों के बीच काफी स्थान रहता है। इसके बाद विलायती बबूल की फलियों को इसमें डाला गया। इससे मजबूत फिल्टर तैयार हो गया जिससे फ्लोराइड के साथ कैल्सिशयम, मैग्नीशियम, स्ट्रांशियम व बैरियम जैसे लवण भी दूर हो गए। इससे खारा पानी मीठा हो गया। डॉ शर्मा ने इस फिल्टर को मटके का रुप दे दिया ताकि आम लोग सीधा उपयोग में ले सके।

मटके से छनकर आता है पानी
बालू, बबलू और हाइड्रोक्सीएपेआइट से यह मटका बनाया है। इससे साफ पानी छनकर नीचे एकत्रित हो जाता है जिससे लोग सीधा उपयोग में ले सकते हैं। इससे फ्लोराइड युक्त पानी से निजात मिलेगी।

डॉ. राके श शर्मा, रसायन विज्ञान विभाग, आईआईटी जोधपुर