2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जोधपुर

National Hugging Day पर जानें कि खुशियां और सुकून देती है’जादू की झप्पी’

जोधपुर ( jodhpur news. current news ). आज नेशनल हगिंग डे ( National Hugging Day ) है। यह हमें एक दूसरे को गले लगाने का संदेश देता है। महात्मा गांधी ( Mahatma Gandhi ) का गांधीवाद ( Gandhism ) जब मुन्नाभाई ( munna bhai ) की गांधीगिरी ( Gandhigiri ) में बदला तो जादू की झप्पी (Jadu ki Jhappi ) शब्द और टर्म ईजाद हुआ। यह लोगों को इतना अच्छा लगा कि एक दूसरे को स्नेह करने वाले लोग हग ( Hug ) कर के उसे जादू की झप्पी नाम देने लगे। पेश है स्पेशल रिपोर्ट:  

Google source verification

जोधपुर

image

MI Zahir

Jan 21, 2020

एम आई जाहिर / जोधपुर ( jodhpur news. current news ) . महात्मा गांधी ने कहा था कि दीन दुखियों का दुख हरना चाहिए, उन्हें गले लगाना चाहिए। गांधीवाद का यह फार्मूला फिल्म में गांधीगिरी के रूप में मुन्ना भाई के किरदार पर आजमाया गया। सेल्युलाइड के पर्दे पर बड़े ही हल्के-फुल्के अंदाज में हास्य के साथ यह संजीदा तथ्य दिखाया गया था कि कोई भी शख्स चाहे गरीब हो या मरीज, उसे अगर प्यार से गले लगाया जाए तो वह अपने सारे दुख दर्द भूल जाता है। यानी एक जादू की झप्पी या प्यार भरी झप्पी जो काम कर देती है, वह कोई दूसरा तरीका नहीं कर पाता। जोधपुर के मनोवैज्ञानिकों का ख्याल है कि आज के जमाने में इस लव थैरेपी, अफैक्शन थैरेपी, सिम्पेथैरेपी या हग थैरेपी की बहुत जरूरत है। यह इमोशन, फीलिंग्स और सेंटीमेंट्स के बहुत नजदीक है। यह अग्रेशन कम करता है और इससे व्यक्ति काम डाउन और कूल रहने के लिए प्रेरित होता है। शहर में एेसे बहुत से समाजसेवी हैं जो बेसहारा बुजुर्गों और बच्चों को अपना कर उनका दुख हरते हैं और उन्हें हग करते हैं।

मुसीबत में हग करने वाला भगवान समान

हग एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इससे दो दो व्यक्तियों में शारीरिक नजदीकियां बनती हैं। वहीं संवेदों और भावनाआें का आदान-प्रदान होता है। हग दबी हुई भावनाएं व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। मनोवैज्ञानिक फ्रॅायड ने इस प्रक्रिया को ‘कैथारसीसÓकहा है। हग का सीधा प्रभाव व्यक्ति के मस्तिष्क पर पड़ता है और इस प्रक्रिया में शामिल दोनों व्यक्तियों की ग्रंथियों में स्राव होता है, जो एक विशेष अनुभूति का अनुभव करवाता है। बचपन से वृद्धावस्था तक हर अवस्था में आलिंगन का अलग-अलग महत्व होता है।

-डॉ.रवि गुंठे, मनोवैज्ञानिक

मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से हग करना एक अपनेआप में एक सुखद और खुशनुमा एहसास है। बच्चा मां को हग कर के अपने आप को सुरक्षित महसूस करता है। इससे मातृत्व की अनुभूति होती है। युवा अवस्था में हग करने से आपसी विश्वास और आकर्षण बढ़ता है। किसी की मृत्यु पर संवेदना व्यक्त करते समय यदि आप परिवार के सदस्य को हग करें तो उस सदस्य की आंखों में आंसू आना स्वाभाविक है। मुसीबत से घिरे व्यक्ति को हग कर के आप भगवान का रूप हो सकते हैं।

-डॉ. नीता जैन,मनोवैज्ञानिक

हग से मिलती है पॉजिटिविटी

हग करने या गले लगाने से हम खुशी और रिलैक्स महसूस करते हैं। वजह से हमारा स्ट्रेस लेवल यानि तनाव कम होता है। साथ ही तनाव या मुश्किल सिचुएशन को हैंडल करने का हौंसला और हिम्मत मिलती है। इससे हमारी मैमोरी भी शार्प होती है। हमारे शरीर में ऑक्सिटोसिन नामल हार्मोन उत्पन्न होता है, जिससे इंसान तनाव और स्ट्रेस से बचता है।वहीं मस्तिष्क की नसें मज़बूत होती हैं और याद्दाश्त बढ़ती है। किसी खास शख्स को हग करने से हम खुद को मुसीबत के वक्त अकेला महसूस नहीं करते।एक प्यारा सा हग आपके दिल और ब्लड प्रेशर की बीमारियों का खतरा कम करता है ।

-डॉ.चंद्रकला गोस्वामी, थैरेपिस्ट मनोवैज्ञानिक