
जोधपुर. आरएएस-2016 में टॉप 100 में शामिल रहे कई अभ्यर्थी रविवार को हुई आरएएस-प्री 2018 परीक्षा में शामिल हुए। कारण यह रहा कि सरकार ने इन्हें दस महीने बाद भी नियुक्ति नहीं दी है। सरकार इनको समय पर नियुक्ति दे देती तो इसमें से कई बतौर एसडीएम इस परीक्षा के लिए गठित उडऩदस्तों में शामिल होते।
दो साल पहले आरएएस-2016 में 15वीं रैंक प्राप्त करने वाले जयपालसिंह राठौड़, अपनी श्रेणी में टॉपर रही सीमा तिवारी, 57वीं रैंक लाने वाले भवानी सिंह और 63वीं रैंक लाने वाले सज्जनसिंह सहित कई अभ्यर्थी इस बार फिर परीक्षा में बैठे। इन अभ्यर्थियों ने कहा कि उन्होंने मायूस मन से ही परीक्षा दी है।
क्या है मामला
आरपीएससी ने आरएएस-2016 में 725 पदों के लिए नियुक्तियां निकाली थी। इसमें राज्य सरकार ने एसबीसी वर्ग को 5 फीसदी आरक्षण देकर कुल आरक्षण सीमा 50 से बढ़ाकर 54 फीसदी कर दी थी। परिणाम आने के बाद कोर्ट ने इस आरक्षण को खारिज कर दिया। इससे सामान्य वर्ग के 19 अभ्यर्थी कोर्ट गए। इनके माक्र्स आरएएस प्री के कटऑफ माक्र्स के पास में ही थे और एसबीसी आरक्षण रद्द करने से उन्हें मुख्य परीक्षा के लिए क्वालिफाई होने की उम्मीद जगी थी। आरपीएससी ने एहतियात बरते हुए इन अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा से दो दिन पहले कॉल लैटर जारी कर दिए। 19 में से 18 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में बैठे, लेकिन एक अभ्यर्थी नहीं बैठी। हाल ही कोर्ट ने इस अभ्यर्थी के लिए अलग से मुख्य परीक्षा लेने व सफल होने पर साक्षात्कार लेने के आदेश दिए हैं। आरपीएससी इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट जाने का मानस बना रही है। यहां विशेष बात यह है कि कोर्ट ने 725 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई है।