
जोधपुर. केंद्र सरकार ने जोधपुर के केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) को इस वर्ष का प्रतिष्ठित ‘सरदार पटेल आउटस्टेंडिंग इंस्टीट्यूट अवार्ड’ देने की घोषणा की है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) की ओर से कृषि क्षेत्र में दिया जाने वाला यह सबसे बड़ा पुरस्कार है। ‘काजरी’ को यह उपलब्धि काजरी को यह सम्मान पिछले 4-5 वर्ष में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और विज्ञान की बाइबिल माने वाली पत्रिका ‘नेचर’ के सन् 2017 के अंक में ‘काजरी’ के निदेशक डॉ. ओपी यादव का शोध प्रकाशित होने के बाद मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संभवत: अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित समारोह में काजरी को यह सम्मान प्रदान करेंगे। इसमें एक शील्ड के साथ 10 लाख रुपए नकद मिलेंगे। काजरी को 66 साल के अपने इतिहास में पहली बार यह पुरस्कार मिला है। इसके लिए उसने 150 संस्थानों को पीछे छोड़ा।
यहां काजरी ने सबको पीछे छोड़ा
– विज्ञान पत्रिका ‘नेचर’ के गत वर्ष के अंक में काजरी के निदेशक डॉ. ओपी यादव का बाजरे में जीनोम सिक्वेंस पर शोध पत्र प्रकाशित हुआ।
– गत दो वर्ष में पहली बार काजरी को तीन पेटेंट मिले।
– इसरो के शोध में खुलासा हुआ कि 2001 से 2012 के दौरान महाराष्ट्र कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में मरुस्थलीकरण बढ़ा वहीं राजस्थान में इस दौरान एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रेगिस्तान में कमी आई। इसका श्रेय काजरी को दिया गया।
– राजस्थान में वर्ष 1966 में हर साल 17 बड़ी आंधियां आती थी जिनकी संख्या वर्ष 2000 तक घटकर 2.5 आ गई। काजरी के टीला स्थिरीकरण और शेल्टर बेल्ट प्लांटेशन मॉडल को इसका श्रेय है।
– मृदा अपरदन से बाजरे के खेत में प्रति हेक्टेयर 195 किलो का नुकसान होता था जो घटकर 3 किलो तक रह गया।
– राज्य सरकार ने पिछले साल काजरी के ऑर्गेनिक मूंग, तिल, इसबगोल व समन्वित कृषि प्रणाली पर 6 प्रेक्टिस पैकेज अपनी किताब में प्रकाशित किए।
– काजरी हर साल अपनी नर्सरी से उद्यानिकी व वानिकी के लिए 1.25 लाख पौधे बेचती है।
– काजरी ने सरकार को पिछले साल 2 करोड़ रुपए कमाकर दिए।
– काजरी ने पहली बार वाटर लोगिंग क्षेत्र के लिए बताया कि कम पानी देने से उत्पादन बढ़ेगा। इसके लिए बीकानेर में फसल में 25 प्रतिशत कम पानी देने पर 15 प्रतिशत अधिक उत्पादन प्राप्त हुआ।