
वीडियो : मनोज सैन/जोधपुर. हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोड़ा ने कल रात एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। बोड़ा लंबे समय से असाध्य रोग से पीडि़त थे। बोड़ा की पार्थिव देह परिजनों ने डॉ एसएन मेडिकल को दान की है। उल्लेखनीय है कि बोड़ा स्वतंत्रा सैनानियों के परिवार से संबंध रखते थे। उनके पिता युगराज बोड़ा और माता सावित्री बोड़ा स्वतंत्रा सैनानी थे। बोड़ा की प्रारंभिक शिक्षा जयपुर में हुई। यहां एसएस सुबाोध जैन महाविद्यालय में वह छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। वामपंथी विचारधारा के बाोड़ा ने अपने शुरुआती दिनों से ही वंचित तबकों के लिए संघर्ष किया। किसान आंदोलनों में भाग लेने के साथ ही विभिन्न संगठनों में भागीदारी निभाई। 1979 में वकालत शुरू करने के साथ ही मजदूरों के हक के लिए अपना संघर्ष जारी रखा। एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके बोड़ा ने मेहरानगढ़ दुखांतिका मामले में चौपड़ा आयोग की ओर से पैरवी की थी। साथ ही वे कई आम व खास मामलों की पैरवी कर चुके हैं। एसोसिएशन की ओर से उन्हें लाइफ टाइम अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है।