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सुनाई देगी वैवाहिक गीतों की गूंज
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बापिणी कस्बे सहित क्षेत्र में इन दिनों विवाह समारोह की धूम है। बसंत पंचमी से शुरू हुए वैवाहिक समारोहों में ग्रामीण क्षेत्रों जहां आयोजक परिवारों में उत्साह का माहौल है। गली-मोहल्लों में वैवाहिक गीतों की गूंज सुनाई दे रही है तो टेंट हाउस से जुड़े कारोबारी, हलवाई भी सावों के चलते व्यस्त है। विवाहों की यह धूम 22 फरवरी तक रहेगी। इसका मुख्य कारण होलाष्टक लगना है। होलाष्टक 23 फरवरी से 1 मार्च तक रहेगा। होलाष्टक के दौरान शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। होलिका दहन के बाद 1 से 14 मार्च के बीच पुन: शुभ कार्य शुरू होंगे।

वैदिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक में विवाह, कोई नवीन कार्य प्रारम्भ करना, विद्यारम्भ, गृह प्रवेश मुंडन, नामकरण ज्योतिष शास्त्र मत से पूर्णतया वर्जित माना गया है। शास्त्रों में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलिका दहन तक के समय को होलाष्टक कहा गया है। होलिका पूजन के लिए होली से आठ दिन पूर्व होलिका दहन वाले स्थल को गंजाजल से शुद्ध कर उसमे सूखी लकड़ी रखकर होलिका डंडे का रोपण किया जाता है। इसी दिन को होलाष्टक प्रारम्भ दिन माना जाता है। स्थानीय भाषा में इसे डंडा रोपण भी कहा जाता है।

इसलिए होलाष्टक में वर्जित है शुभ कार्य
सोहन द्विवेदी व ज्ञानमल पंचारिया ने बताया की ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अष्टमी से पूर्णिमा तक के आठ दिन तक सभी ग्रह उग्र रूप लिए होते हैं। इससे इस अवधि में व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता कमजोर रहती है । इसी वजह होलाष्टक के दौरान मांगलिक कार्यों में अमंगल होने की आशंका के चलते शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं।