कानपुर देहात-एक के बाद एक दुखों का पहाड़ टूटने के बाद विधवा वृद्धा आज भी अपने अधिकार के लिए दर दर भटक रही है। कच्ची कुटिया में जैसे तैसे गुजर कर रही तहसील क्षेत्र मैथा के बड़ा गाँव औनहां की गरीब विधवा महिला कलावती, जो शादी के कुछ समय बाद ही विधवा हो गई थी। इसके बाद वह अकेले ही जीवन गुजार रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य आवासीय योजना आने के बाद उसके जेहन में एक पक्के आवास में रहने की आस जागी। ग्राम प्रधान से लेकर आला अधिकारियों तक उसने गुहार लगाई, लेकिन उसके हाँथ खाली के खाली रह गए।
पंद्रह वर्ष पूर्व पति गुजर गए थे
विधवा कलावती का आरोप है कि जब उसने ग्राम प्रधान से आवास व शौंचालय के लिए कहा तो वह उसके एवज में रुपये मांगते है। उसका कहना है कि उसके पास एक भी रुपया नही है। यहां तक कि बीमार होने पर उसके पास दवा के लिए भी पैसे नहीं होते हैं। वह बीमारियों से भी जूझकर जिंदगी बसर कर रही है। उसके मुताबिक करीब 15 वर्ष पूर्व पति के देहात के बाद वह इसी कच्चे मकान में रह रही है, जो अब पूरी तरह से टूट चुका है। जो कभी भी गिरकर हादसे को दावत दी सकता है। कई बार प्रधानों के पास जाती रही लेकिन सिवाय आश्वाशन के कुछ नहीं मिला।
प्रधान से लेकर अफसरों तक लगाई गुहार
वहीं वर्तमान में महिला प्रधान आमना बेगम प्रधान पति से जब अपने आवास के लिए कहा तो उसने उस गरीब महिला से रुपयों की मांग कर दी, जिससे विधवा ने असमर्थता जताते हुए मना कर दिया। एक तरफ सरकार गरीबों के लिए तमाम योजनाओं के माध्यम से लाभ पहुंचाने में प्रयासरत है, लेकिन भृष्ट प्रधान अधिकारियों संग मिलकर किस तरह गरीबों के अधिकार को हनन करने में लगे हुए हैं। विधवा वृद्धा कलावती इसका साक्षात उदाहरण है। उसका कहना है कि ग्राम प्रधानों से लेकर जिलाधिकारी तक अरदास लगाई लेकिन नतीजा सिफर रहा। वह पूरी तरह हताश हो चुकी है। आज वह अपनी शेष जिंदगी कच्चे टूटे फूटे मकान में गुजारने को मजबूर है। अब उसे लगता है कि उसकी जिंदगी कच्चे मकान से शुरू होकर उसी में खत्म हो जाएगी।