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कानपुर

90 सेकेंड में आईजी ने सूभाष बाथम को किया ढेर, अपराधी दंपत्ति की बेटी को बनाएंगे आईपीएस

फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद के करथिया गांव में 24 बच्चों को बंधक बनाने और पुलिस मुठभेड़ में मारे गए सिरफिरे की बेटी की पुलिस ने लिया गोद ।  

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कानपुर। फर्रूखाबाद स्थित एक आरोपी ने 25 बच्चों का अगवा कर घर में कैद कर हड़कंप मचा दिया। सरकार, पुलिस-प्रशासन के अलाधिकारी मौके पर पहुंचे। आरोपी को समझाने का प्रयास किया लेकिन उसने फायरिंग कर दी। इस घड़ी में आईजी जोन कानपुर मोहित अग्रवाल ने मोर्चा संभाला। टीम के सदस्यों के साथ 11 मिनट में रणनीति बनाई और 90 सेकेंड में सुभाष बाथम को मुठभेड़ में ढेर दिया। इस दौरान अपराधी की पत्नी की भी मौत हो गई। अपराधी दंपत्ति की मौत के बाद उनकी मासूम बेटी गौरी की परवरिस से जब परिजनों ने हाथ खड़े कर लिए। तब आईजी ने तत्काल दस हजार रूपए दिए और पुलिस ने उसे गोल लिया है। जिसे पढ़ा लिखाकर पुलिस आईपीएस अधिकारी बनाएगी।

क्या है पूरा मामला
फर्रुखाबाद की मोहम्मदाबाद कोतवाली इलाके के गांव करथिया के सिरफिरे सुभाष बाथम ने गुरुवार दोपहर ढाई बजे अपनी एक साल की बेटी कुसुम की बर्थडे पार्टी के बहाने गांव के 26 बच्चे बुलाए और तहखाने में बंधक बना लिया था। मौसा के कत्ल में उम्र कैद की सजा पा चुके सुभाष के इस कृत्य में उसकी बीवी रूबी भी सहयोगी बनी। बच्चों को सकुशल बचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद डीजीपी ओपी सिंह व अन्य से पल-पल अपडेट ले रहे थे। वारदात की जानकारी मिलते ही आईजी रेंज कानपुर मोहित अग्रवाल दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और मासूमों को आरोपी के चंगुल से सकुशल छुड़ाए जाने की रणनीति बनाई।

फिर शुरू कर दिया आपरेशन
आईजी के मुताबिक जब मौके पर पहुंचे तो भीड के साथ पुलिस मौजूद थी। अचानक सुभाष के धर से आवाज आईं। उसने चिल्ला कर कहा कि अब मैं बच्चों को मार डालूंगा और फिर दो फयार किए। फायरिंग के बाद लगा कि बच्चों की जान खतरे में है तो हमनें आपरेशन शुरू कर दिया। सीड़ी के जरिए छत पर गए और घर की भौगोलिक स्थित को परखा। तब पता चला कि धर के पीछे की तरफ एक गेट है और इसी के जरिए अंदर प्रवेश किया जा सकता है। हम एक टीम के साथ अंदर दाखिल हुए तो आरोपी ने फायर कर दिया, जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया, जबकि उसका साथ रही पत्नी को भीड़ ने मार दिया।

मैं हमेशा पैसे डालता रहूंगा
आईजी ने बताया कि इस घटना के बाद सुभाष के परिवार वालों ने बच्ची की जिम्मेदारी उठाने से ही इनकार कर दिया था। जिसके बाद उसकी परवरिस पुलिस करने के साथ ही पढ़ाई-लिखाई का सरा खर्च खुद पुलिस करेगी। आइजी रेंज मोहित अग्रवाल ने बताया कि बच्ची को फिलहाल हमने फर्रूखाबाद की एक महिला पुलिस कर्मचारी रजनी के पास रखा है। उसकी अच्छी देखभाल हो रही है। कहा, मेरी ख्वाहिश है कि बच्ची को मैं अपनी तरह एक आईपीएस अफसर बनाऊं। मैं बैंक में एक खाता खुलवा रहा हूं, जिसमें मैं हमेशा पैसे डालता रहूंगा ताकि गौरी की शिक्षा और परवरिश में कोई दिक्कत ना आए।

कई लोगों ने संपर्क किया
आईजी अग्रवाल ने कहा कि गौरी को गोद लेने के लिए देश-विदेश से कई लोगों ने संपर्क किया है। लेकिन हम पूरी जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बगैर उसे किसी को नहीं दे सकते हैं। अगर कोई परिवार उसे गोद लेता भी है तो मैं उसकी परवरिश पर व्यक्तिगत रूप से नजर रखूंगा। अग्रवाल ने कहा कि हमारा प्रयास होगा कि इस बच्ची को पुलिस में कार्यरत कोई दम्पत्ति गोद लें ले ताकि उसे बेहतर परवरिश मिल सके। आईजी ने बताया कि गौरी के पिता शातिर अपराधी था। पुलिस उसे जिंदा गिरफ्तार करने के साथ अगवा बच्चों को सकुशल छुड़ाना चाहते थे। लेकिन शातिर ने फायरिंग कर दी, जिसके कारण वह मारा गया।

सबसे कठिन आपरेशन
आईजी ने बताया कि मेरे अब तक के करियर में यह सबसे कठिन आपरेशन था वह इसलिए कि पहला इसमें 24 बच्चों की जान खतरे में थी। ओरापी का भरोसा नहीं किया जा सकता था। दूसरा यह कि अमूमन ऐसे मामलों में पति को फंसता देख पत्नी उसे समझाती है पर यहां उसकी पत्नी इस अपराध में बराबर साथ दे रही थी। आइजी के मुताबिक हमनें फांप लिया था कि सुभाष के पास आधुनिक हथियार नहीं हैं। यह आॅपरेशन जल्द भी खत्म किया जा सकता था पर हम बच्चों की जान किसी भी कीमत पर खतरने में नहीं डालना चाहते थे। फिलहाल उसके पास हथियार कहां से आए और बरामद मोबाइल के बारे में पुलिस जांच पड़ताल कर रही है।