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कानपुर

उस घटना ने जब शिक्षक को झकझोर दिया, तो उन्होंने गरीबों के लिए ऐसी समाजसेवा शुरू की, लोग तारीफ करते नहीं थक रहे

उन्होंने इसका श्रेय अपने बड़े भाई राकेश वर्मा व अपने सहयोगियों को दिया है।

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अरविंद वर्मा

कानपुर देहात-सच कहें तो समाज में मानवता आज भी जीवित है। इसका जीता जागता उदाहरण है कानपुर देहात के मंगलपुर की ग्रामीण शिक्षा उत्थान एवं मानव सेवा समिति। इस समिति का निर्माण करने वाले एक सामान्य से व्यक्तित्व के धनी शिक्षक महेंद्र वर्मा उर्फ बबलू हैं, जिन्होंने समाज के दुर्बल लोगों का दर्द महसूस किया। राह चलते परेशान व्यक्तियों की समस्याओं का पूछना और वो समस्याएं उनको झुंझला देने लगी। सरल स्वभाव के धनी महेंद्र सतौरा परिषदीय विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। अपने पद का निर्वहन करते हुए उन्होंने ऐसे आर्थिक रूप से दुर्बल लोगों के लिए कुछ करने की ठान ली। संघर्षों से जूझकर अपने पैरों पर खड़े हुए शिक्षक महेंद्र वर्मा का शुरुवात का जीवन आर्थिक स्थितियों में बीता। बड़े भाई राकेश वर्मा के मार्गदर्शन ने उनको जीवन की नई किरण दी और फिर परिषदीय विद्यालय में शिक्षक पद पर उन्हें नौकरी मिली और एक नया आयाम स्थापित हुआ। आज वो कुछ ऐसे कार्य करने में मशगूल हैं कि लोग तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।

उस महिला की घटना से मिली प्रेरणा

16 वर्ष पहले का वाक्या है। 2003 में जब महेंद्र अपने विद्यालय के लिए घर से निकले थे। तभी रास्ते में जगदीशपुर गांव के समीप एक गरीब महिला सूखी लकड़ियां एकत्रित कर रही थी। समीप ही उसका एक मासूम बच्चा एक पेड़ के पास बैठा था। ठंड का मौसम और महिला के तन पर एक साड़ी के साथ पतला सा स्वेटर लेकिन पैरों में चप्पल नहीं थी। पास बैठे मासूम और महिला को देख शिक्षक ने बाइक खड़ी कर दी और उससे कुछ पूंछा तो महिला की बात सुनकर महेंद्र सन्न रह गए। दरअसल महिला खुदगर्ज थी और वो किसी से कुछ मदद नहीं चाहती थी। फिर भी शिक्षक ने उस मासूम का वास्ता देते हुए उसे अपना जैकेट देते हुए सुकून महसूस किया। बस वो वाकया महेंद्र को छू गया। उन्होंने अब समाज के ऐसे गरीबों के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर करने का मन बना लिया।

फिर इन चिकित्सक से मिली ऊर्जा तो किया ये काम

अब वो विद्यालय से आने के बाद सिर्फ इसी चिंतन में रहते थे कि किस तरह लोगों की मदद की जाए। मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले महेंद्र ने अपने साथियों मंगलपुर के डॉ राजेंद्र वर्मा सहित अन्य लोगों से परामर्श किया तो उन्होंने गरीबों के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने सहित ठंड में गरीबों को गर्म कपड़े वितरित करने का प्रण लिया। फिर क्या था सभी सदस्यों ने मिलकर ग्रामीण शिक्षा उत्थान एवं मानव सेवा समिति का निर्माण कर डाला। धीरे धीरे नवोदय की परीक्षाएं, निशुल्क कोचिंग सहित निशुल्क नेत्र शिविर लगवाकर लोगों की सेवा करना उनका ध्येय बन गया। इस सराहनीय कार्य को देखते हुए धीरे धीरे लोग समिति से जुड़ने लगे और सहयोग करने लगे कि क्यों न ये समाजसेवा की जाए। फिर 2015 में कृष्णा इंजीनियरिंग कालेज के निदेशक विवेक कुशवाहा संपर्क में आए। उन्होंने पूरी तरह से सहयोग करने की बात कही तो महेंद्र को ऊर्जा प्राप्त हुई।

गरीबों को कपड़े वितरित करना शुरू किया

फिर हिम्मत जुटाकर समिति के लोगों ने ठंड के मौसम में गरीबों को गर्म कपड़े वितरित करने शुरू किए और कड़ाके की ठंड में कम्बल देने का प्रक्रिया शुरू कर दी। इस वर्ष भी समिति के द्वारा करीब एक माह पूर्व से क्षेत्र में लोगों के सहयोग से गर्म कपड़े एकत्रित किए गए और क्षेत्र के करीब 500 गरीब महिला व पुरुषों को वितरित किए गए। महेंद्र कहते हैं कि कपड़े पाकर जब गरीबों के चेहरे पर मुस्कराहट दिखी तो बहुत सुकून मिला। मानो लगा कि मैंने पूरा जीवन जी लिया। सबसे अहम बात यह है कि महेंद्र विद्यालय से आकर उन कपड़ों को धुलकर प्रेस करके तैयार करते हैं और इस कार्य में उनकी पत्नी व बच्चे भी सहयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि कपड़े वितरण के बाद अब 15 दिसंबर को मंगलपुर, 20 दिसंबर को सिकंदरा फिर रसूलाबाद, झींझक सहित जिले के कई स्थानों पर कम्बल भी वितरित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ईश्वर की अनुकम्पा बनी रहेगी तो यह समाजसेवा अनवरत जारी रहेगी। उन्होंने इसका श्रेय अपने बड़े भाई राकेश वर्मा व अपने सहयोगियों को दिया है।