हिण्डौनसिटी. अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (उच्च शिक्षा) की राजकीय महाविद्यालय इकाई ने बुधवार को राजसेस महाविद्यालयों की वर्तमान संकल्पना और संचालन व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन किया। प्राध्यापकों ने महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर काली पट्टी बांधकर और मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। बाद में उपखंड अधिकारी कार्यालय पहुंच का एसडीएम हेमराज गुर्जर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
महासंघ के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे सहायक आचार्यों का कहना है कि राजसेस योजना के अंतर्गत संचालित महाविद्यालयों का वर्तमान स्वरूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मूल भावना के विपरीत है। स्थानीय इकाई के सचिव डॉ. रीतेश जैन ने बताया कि इन महाविद्यालयों में स्थायी शैक्षिक ढांचे का अभाव, अपर्याप्त अधोसंरचना, शोध और नवाचार की कमी तथा संविदा आधारित नियुक्तियों पर निर्भर अध्यापन व्यवस्था उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और निरंतरता को प्रभावित कर रही है। जिला सह सचिव डॉ. श्रीनिवास गुर्जर ने बताया कि सत्र 2020-21 से 2022-23 के बीच 303 नए राजसेस महाविद्यालय खोले गए, जबकि वर्तमान सरकार ने सत्र 2023-24 और 2024-25 में 71 अतिरिक्त महाविद्यालय स्थापित किए। इस प्रकार इनकी संख्या 374 हो गई है। इनमें से लगभग 260 महाविद्यालयों में आज भी एक भी स्थायी संकाय सदस्य कार्यरत नहीं है, जो नीति के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। उन्होंने नाराजगी जताई कि विद्या संबल के तहत लगाए गए प्राध्यापकों में आगामी सत्र में सेवा के लिए चयनित होने को लेकर असुरक्षा सी रहती है। इससे महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित रहता है। प्रदर्शन के बाद संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंप सभी राजसेस महाविद्यालयों को सामान्य राजकीय महाविद्यालयों के रूप में संचालित करने और संविदा नियुक्तियों की प्रस्तावित प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। विरोध प्रदर्शन में गंगा राम मीना, मुकेश कुमार गोयल, डॉ. अनिल अग्रवाल, यशस्वी मीना, राजकुमारी, उपमा मीना, शालिनी गुप्ता, डॉ. आशा राठौर और भूप सिंह सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
लागू हों सोडाणी समिति की सिफारिशें
सहायक आचार्यों ने बताया कि विधानसभा चुनाव-2023 के बाद गठित राज्य सरकार द्वारा बनाई गई सोडाणी समिति की सिफारिशें अब तक सार्वजनिक या लागू नहीं की गई हैं। उन्हें जल्द लागू किया जाए। वहीं भर्ती परीक्षा कैलेंडर-2026 के अंतर्गत राजसेस नियम-2023 में संशोधन कर पांच वर्षों के लिए 28,500 रुपये के नियत वेतन पर संविदा शिक्षण सहयोगी और अशैक्षणिक पदों की चयन प्रक्रिया शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। जो गलत है।