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करौली. जिले के कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र में एक बार फिर खुश-खबरी फैली है। रणथंभौर बाघ परियोजना (द्वितीय) करौली के सपोटरा वन क्षेत्र में बाघिन टी-135 ने दो शावकों को जन्म दिया है। इससे कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र में बाघों का कुनबा भी बढ़ा है। इससे पहले इसी वर्ष फरवरी माह में भी जिले के मण्डरायल वन क्षेत्र में बाघिन-टी 2303 ने दो शावकों को जन्म दिया था। अब बाघिन-135 ने दो शावकों को जन्म देकर जंगल में खुशखबरी फैलाई है।
रणथम्भौर टाइगर रिजर्व द्वितीय करौली के उपवन संरक्षक एवं उप क्षेत्र निदेशक पीयूष कुमार शर्मा ने बताया कि बाघिन टी- 135 के शावक का गत माह 16 मई और उसके बाद 29 मई को सपोटरा क्षेत्र के नैनियाकी रैंज में शावकों के साथ कैमरे में ट्रेप हुई है। इसके बाद से विभागीय टीम की ओर से शावकों की निगरानी की जा रही है। साथ ही स्टाफ द्वारा सघन गश्त की जा रही है।
गौरतलब है कि कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र रणथम्भौर अभ्यारण्य का द्वितीय क्षेत्र है, जहां से बाघों का यहां पर लगातार आना-जाना बना रहता है। बीते वर्षों में कई बाघों ने यहां दस्तक दी है। संभवत: यह चौथा मौका है जब कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र में बाघिन ने शावकों को जन्म देकर जंगल में खुश खबरी फैलाई है। इससे पहले बीते वर्षों में भी कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग बाघिन शावकों को जन्म दे चुकी हैं।
मण्डरायल-सपोटरा क्षेत्र में जन्में हैं शावक
इससे पहले बीते वर्षों में भी कैलादेवी अभयारण्य क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग बाघिन शावकों को जन्म दे चुकी है। टी-72 सुल्तान और टी-92 सुंदरी के जोड़े को मण्डरायल क्षेत्र का नींदर रेंज खूब भाया और यहां पर लम्बे समय तक ठहराव भी किया। इसी बीच इस जोड़े ने दो शावकों को जन्म देकर कैलादेवी अभयारण्य में खुशखबरी फैलाई थी। इसके बाद जनवरी 2021 में कैलादेवी रेंज के अन्तर्गत नाका राहर ब्लॉक चिरमिल के घोड़ीखोह नाला में मादा बाघ-टी -118 के दो शावकों के साथ कैमरे में फोटो ट्रेप हुई थी। इसके बाद फरवरी 2025 में बाघिन टी- 2303 ने मण्डरायल वन क्षेत्र में दो शावकों को जन्म दिया था। अब टी-135 ने सपोटरा के नैनियाकी रैंज में दो शावकों को जन्म देकर जंगल में बाघों का कुनबा बढ़ाया है। गौरतलब है कि टी-135 ने इससे पहले 2023 में भी नैनिया की रेंज के डगरा पठार वन क्षेत्र में दो शावकों को जन्म दिया था।