पर्यावरण संरक्षण और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए मनरेगा के तहत एक बगिया मां के नाम अभियान में भारी भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही है। मंगलवार को ग्राम पाडल्या की महिलाओं ने योजना के तहत बगिया लगाने के बाद सरपंच, सचिव द्वारा राशि का आहरण कर लिया, लेकिन हितग्राहियों को रुपए नहीं दिए गए। हितग्राही महिलाओं ने मामले में जांच कर सरपंच-सचिव पर कार्रवाई कर रुपए दिलाने की मांग की है।
ग्राम पाडल्या से आई गंगाबाई ने बताया कि उन्होंने एक बगिया मां के नाम योजना में एक एकड़ में 100 पौधे लगाए है। योजना के तहत 3 साल में 2.78 लाख रुपए की राशि मिलना है, लेकिन जानकारी निकाले पर पता चला कि उनके नाम से 1.16 लाख रुपए निकाले जा चुके है। जबकि इस राशि में से उन्हें एक रुपए भी नहीं दिया गया। ममताबाई ने बताया कि एक बगिया मां के नाम योजना में उन्हें 4500 रुपए और 10 हजार रुपए नकद दिए गए। पंचायत द्वारा पूरी राशि का आहरण कर लिया गया, लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया गया। अनिताबाई दिलीप ने बताया कि उन्हें भी मात्र 10 हजार रुपए दिए गए और 90 हजार रुपए सचिव निकालकर खा गया। सुभद्राबाई ने भी बताया कि उन्हें नकद 11 हजार रुपए और 4 हजार रुपए खाते में डाले गए, बाकी रुपए सरपंच-सचिव निकालकर खा गए। महिलाओं ने बताया कि इसके पूर्व 9 दिसंबर को भी उन्होंने शिकायत की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई या जांच नहीं हुई है।
अन्य गांवों में भी भ्रष्टाचार की शिकायतें
एक बगिया मां के नाम योजना में अन्य गांवों से भी शिकायतें आ रही है। पिछले मंगलवार भी शाहपुरा माल के ग्रामीणों ने जनसुनवाई में पहुंचकर आवेदन दिया था कि एक बगिया मां के नाम हितग्राहियों के बजाए सरपंच-सचिव रुपए निकालकर खा गए है। उल्लेखनीय है कि योजना के तहत जिले में 995 स्थानों पर 1280 महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से 1301 एकड़ में पौधरोपण के कार्य स्वीकृति हुए है। जिसमें से 1038 एकड़ में एक लाख से अधिक पौधों का रोपण हुआ है। योजना के तहत हितग्राही को 3 लाख रुपए दिए जाने है।