
जेल प्रशासन की ओर से इस अवसर पर विशेष व्यवस्था की गई थी। नारियल, रूमाल, राखी व लड्डू की व्यवस्था की गई थी। जेल के बाहर मुलाकात पंजीयन कक्ष के पास केटिन से 100 रुपए में यह सब सामान बहनों ने खरीदा। सुरक्षा जांच के बाद बहनों को मुलाकात कक्ष में ले जाया गया, जहां उन्होंने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर आरती उतारी और राखी बांधी।
जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी ने बताया कि रक्षाबंधन पर करीब 400 बंदियों को राखी बांधी गई है। शाम चार बजे तक यह सिलसिला चलता रहा। इस मौके पर कई बंदियों ने भावुक होकर स्वीकार किया कि गलती से भटकने के कारण वे यहां पहुंचे हैं और अब बहनों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए नई शुरुआत करेंगे। हर राखी के साथ बहनों ने भाई के सुरक्षित और सही राह पर चलने की प्रार्थना की, जबकि भाइयों ने जीवन में बदलाव का संकल्प लिया।