आदिवासी बहुल क्षेत्र हरसूद में तीन दिवसीय आदि्रंग महोत्सव कार्यक्रम हुआ। इसमें नृत्य, संगीत, शिल्प कलाओं का संगम आदि संस्कृतियों की प्रस्तुतियों से श्रोता मंत्रमुग्ध हुए। छनेरा स्टेडियम में महोत्सव का शुभारंभ हुआ। महोत्सव में तीन दिन के दौरान गणगौर नृत्य, ढीमसा नृत्य, लहंगी नृत्य और भीली गायन से गूंज उठा। इस दौरान गणगौर नृत्य में छमछम बाजे मां की पैजनिया आदि गीतों पर श्रोता थिरके।
सांस्कृतिक विविधता हमारे देश की पहचान
केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में भगवान बिरसा मुंडा, टंट्या भील, शंकर शाह और रघुनाथ शाह जैसे जननायकों के योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि हमारे देश की पहचान सांस्कृतिक विविधता के कारण है। आदिरंग महोत्सव कार्यक्रम के माध्यम से देश की विभिन्न जनजातीय लोक कलाओं का प्रदर्शन एक ही मंच से हो रहा है। मंत्री डॉ. विजय शाह ने कहा कि जनजातियों की कला एवं संस्कृति का प्रदर्शन हरसूद के नागरिकों को आज देखने को मिल रहा है। विधायक कंचन तनवे ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
मंत्री बोले, रोशनी में बनेगा कला भवन का प्रशिक्षण केंद्र
मंत्री विजय शाह ने कहा मुख्यमंत्री ने रोशनी में 19.78 करोड़ रुपए लागत से सामुदायिक कला भवन सह प्रशिक्षण केंद्र स्वीकृत किया है। उन्होंने बताया कि इस केंद्र में आदिवासी वर्ग के ग्रामीणों को उनकी जनजाति से संबंधित लोक गायन, वादन, आदिवासी लोक नृत्य, आदिवासियों की परंपरागत चित्रकला और अन्य लोक कलाओं के संबंध में प्रशिक्षित किया जाएगा।
बड़े शहरों की तरह अब छोटे शहरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम
मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि जनजातीय वर्ग के विकास के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि हरसूद जैसे छोटे से शहर में आदिरंग महोत्सव जैसे कार्यक्रम का आयोजन एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, क्योंकि इस तरह के आयोजन सामान्यत: इंदौर, भोपाल, जबलपुर जैसे महानगरों में होते हैं।
महोत्सव से संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा
खंडवा की महापौर अमृता यादव ने कहा कि आदिरंग महोत्सव के आयोजन को इस क्षेत्र के नागरिक हमेशा याद रखेंगे। इस तरह के आयोजन से संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि महोत्सव के माध्यम से स्थानीय नागरिकों को एक ही मंच पर देश के विभिन्न राज्यों की जनजातीय संस्कृति का प्रदर्शन देखने को मिल रहा है जिसे यहां के लोग वर्षों तक याद रखेंगे।
ये कार्यक्रम हुए
आदि रंग महोत्सव में वीरांगना रानी दुर्गावती नृत्य-नाट्य, उज्जैन का मटकी नृत्य कृष्णा वर्मा एवं साथियों द्वारा, करमा-सैला नृत्य गोण्ड जनजातीय की प्रस्तुति उपेन्द्र सिंह एवं साथी-सीधी द्वारा, ठाट्या नृत्य गोण्ड जनजातीय- अर्जुन बाघमारे एवं साथी-बैतूल द्वारा, सिरमोरीनाटी नृत्य जोगिंदर सिंह हब्बी एवं साथी-हिमाचल प्रदेश द्वारा, गुसाड़ी नृत्य टी. श्रीधर एवं उनके साथी -तेलंगाना द्वारा तथा नटुआ नृत्य बीरेंद्र कालिन्दी एवं उनके साथी -प. बंगाल द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके अलावा कार्यक्रम में जनजातीय जनयोद्धाओं पर केन्द्रित जननायक चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई।