कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी के भोपाल दौरे के बाद प्रदेशभर में संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए कवायद शुरू हो गई है। रविवार को चार दिवसीय दौरे पर एआइसीसी संगठन सृजन अभियान खंडवा प्रभारी बृजेंद्र प्रताप सिंह गांधी भवन पहुंचे। यहां जिलाध्यक्ष की दौड़ में कई चेहरे सामने आए, लेकिन सुबह ही एआइसीसी प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा जारी फरमान के चलते कईयों के अरमान ठंडे पड़ गए। दरअसल एआइसीसी ने जिलाध्यक्ष के लिए 35 से 45 वर्ष आयु सीमा तय कर दी, जिसके चलते कई दावेदार अपने आप दौड़ से बाहर हो गए।
संगठन सृजन अभियान बृजेंद्र प्रताप सिंह सोमवार दोपहर 3.30 बजे खंडवा पहुंचे। यहां उनके साथ पीसीसी से नियुक्त सह प्रभारी विपिन वानखेड़े और रीना बौरासी भी साथ रहे। मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने अभियान की जानकारी दी और बताया कि एआइसीसी के निर्देशानुसार छह-छह नाम का एक पैनल तैयार किया जाएगा। जिसकी स्क्रुटनी एआइसीसी और पीसीसी पर्यवेक्षकों द्वारा तय किया जाएगा। उम्र को लेकर उन्होंने बताया कि प्रदेश प्रभारी द्वारा क्राइट एरिया तय किया गया है, लेकिन विशेष परिस्थिति में कोई उम्र की सीमा नहीं रखी जाएगी। वर्षों से कांग्रेस का झंडा उठाने वाले, योग्य व्यक्ति को मौका दिया जा सकता है। यह एआइसीसी द्वारा तय किया जाएगा।
बंद कमरें में की एक-एक से चर्चा
बैठक के बाद प्रभारी व सहप्रभारियों द्वारा बंद कमरे में एक-एक उम्मीदवार और उनके समर्थकों से चर्चा की गई। रियाज हुसैन के नेतृत्व में मुस्लिम डेलिगेशन मिला और जिलाध्यक्ष या शहर अध्यक्ष के लिए मुस्लिम वर्ग से प्रतिनिधित्व मांगा। राजकुमार कैथवास ने पत्र देकर मांग की कि जो अपने बूथ से चुनाव नहीं जीत पाए, ऐसे उम्मीदवारों को बाहर रखा जाए। इस दौरान राजनारायण सिंह पुरनी, अजय ओझा, डॉ. मुनीष मिश्रा, श्याम यादव, कुंदन मालवीय, उत्तमपाल सिंह पुरनी, मनोज भरतकर, रामपालसिंह केहलारी सहित अन्य नेताओं ने भी अपनी बात रखी।
हर उम्मीदवार से भरवाया फार्म
इस बार एआइसीसी ने जिलाध्यक्ष, शहर अध्यक्ष के लिए अलग ही व्यवस्था की है। बायोडेटा लेने की बजाए उम्मीदवार से एक फार्म भरवाया गया। इस फार्म में व्यक्तिगत जानकारी सहित संगठन में पद, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जा रहे कार्य, कितने चुनाव लड़े, कितने आंदोलन किए आदि भी जानकारी ली गई।
बाहर लगते रहे नेताओं के नारे
बंद कमरे में चल रही वन-टू-वन चर्चा के दौरान नेताओं के समर्थक शक्ति प्रदर्शन से भी बाज नहीं आए। गांधी भवन के बाहर नेताओं के समर्थक जिंदाबाद के नारे लगाते रहे। इस दौरान दो नेताओं के बीच मामूली बहस की स्थिति भी बनी। अन्य नेताओं ने समझाइश देकर अलग किया।