
मामला ग्राम धरमपुरी से करीब पांच किमी दूर नंद मोहन गोशाला का है। गायों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से आसपास के गांव में सनसनी फैल गई है। ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और गोशाला प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगने लगे। ग्रामीणों का कहना हे कि गोशाला में गायों को न तो समय पर चारा मिला और न ही पर्याप्त पानी, जिसके कारण कई गायें दम तोड़ गई। स्थिति तब और भयावह हो गई, जब मृत गायों के शवों को नियमों के तहत दफनाने के बजाय खुले मैदान में फेंक दिए जाने की बात सामने आई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मृत गायों के शवों को वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने के बजाय गोशाला परिसर के पास खुले मैदान में फेंक दिया गया।
प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप
धरमपुरी निवासी रोहित ठाकुर ने बताया कि गोशाला में काफी समय से अव्यवस्था और लापरवाही चल रही है। गायों के लिए पर्याप्त चारा और पानी की व्यवस्था नहीं है। कई दिनों से गायों की हालत खराब थी, लेकिन गोशाला संचालकों ने कोई ध्यान नहीं दिया। ग्रामीण अनिरुद्ध का कहना है कि इसी वजह गायों की मौत हो गई। गायें धीरे-धीरे कमजोर होती चली गई और आखिरी में भूख-प्यास से उनकी मौत हो गई। खेत वालों ने दुर्गंध आने पर इस घटना ने गोशाला प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि हमने जावर थाने में वीडियो दिखाकर की शिकायत की जब प्रशासन हरकत में आया है। जावर थाना प्रभारी श्याम सिंह भादले पुलिसकर्मियों के साथ गोशाला पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी केवल औपचारिकता निभाते नजर आए और मामले को दबाने की कोशिश की गई। ग्रामीणों का कहना है कि जांच के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई की जा रही है, जबकि दोषियों के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया जा रहा। गोशाला में भ्रष्टाचार और अनदेखी के चलते यह स्थिति बनी।
दफनाने के लिए कर्मचारी नहीं था बताया
जावर थाना प्रभारी भादले ने बताया कि सरपंच ग्रामीणों की शिकायत की थी की गांव के पास संचालित गोशाला में मौत हुई थी। यहां पता चला की कुछ गायों की मौत हुई है। दफनाने वाला कर्मचारी नहीं था इसलिए समय पर नहीं दफनाया गया ऐसा बताया गया है। गोशाला संचालक को ठीक से गायों की देखभाल करने के लिए कहा है।
गायों के शव दफनाने की बजाए फेंकने पर कुछ नहीं बोल पाए
इस मामले में गोशाला संचालक दीपक बरोले का कहना है कि गोशाला में गाय को देखभाल के लिए आदमी है। अभी एक दो गाय मरी हैं। जो गाय के शव पड़े है वो पुराने हैं। गाय की मरने की सूचना ऑनलाइन देते हैं। हालांकि वे यह नहीं बता पाए कि गायों को दफनाने की बजाए फेंका क्यों गया। उनके साथी उलटा गायों के शव लोगों द्वारा गांव से फेंके जाने की बात कर रहे हैं। वहीं मौजूद ग्रामीणों ने कहा कि गांव के लोग इधर नहीं लाते। गांव से दो किमी पर ही व्यवस्था है।