
ओंकारेश्वर में आदिगुरू शंकराचार्य के प्रकटोत्सव के उपलक्ष्य में ‘ एकात्म धाम ’ में ‘ एकात्म पर्व ’ का पंच दिवसीय हुआ। इसमें देश, विदेश के विद्वान के साथ ही शंकर दूत बनने के लिए आईआईटीएन शामिल हुए। समापन दिवस पर जूनापीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी, चिन्मय मिशन के स्वामी तेजोमयानंद सरस्वती, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी आदि ने संबोधित किया।
नर्मदा तट पर 700 युवाओं ने ली ‘ शंकरदूत ’ की दीक्षा
जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि एवं अन्य संतों की उपस्थिति में मंगलवार को प्रातः 6 बजे नर्मदा तट पर आयोजित दीक्षा समारोह में देश-विदेश के 700 से अधिक युवा ‘ शंकरदूत ’ के रूप में दीक्षित हुए। इसमें देश-विदेश के कई आईआईटीएन भी शामिल हुए। जो इंग्लैंड समेत पूरे विश्व में शंकर का संदेश देंगे।
ओंकारेश्वर एकात्मता का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनेगा
प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने ओंकारेश्वर में अद्वैत लोक के निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगभग 2400 करोड़ रुपए लागत से बन रहे इस अद्वैत लोक का निर्माण शुरू हो चुका है। प्रभारी मंत्री ने कहा कि ओंकारेश्वर को एकात्मकता के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
अद्वैत लोक में डिजिटल लाइब्रेरी बनेगी
प्रभारी मंत्री ने कहा जनवरी से अप्रे 2027 तक आदि शंकराचार्य के जन्म स्थान कालड़ी, केरल से केदारनाथ तक लगभग 17 हजार किलोमीटर की ‘ एकात्म यात्रा ’ आयोजित की जाएगी। ओंकार पर्वत पर 38 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 हजार पौधे लगाकर ‘ अद्वैत वन ’ भी विकसित किया जा रहा है। अद्वैत लोक में एक डिजिटल लाइब्रेरी का निर्माण किया जाएगा, जिसमें आदि शंकराचार्य रचित प्राचीन ग्रंथों की डिजिटल पांडुलिपि उपलब्ध रहेगी।
शंकर का संदेश विश्व के कोने तक पहुंचाएं
कार्यक्रम में स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ‘ एकात्म धाम ’ और ‘ अद्वैत लोक ’ की स्थापना वैश्विक संदेश है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब शंकर दूत केवल भारत तक सीमित न रहें, बल्कि आचार्य शंकर का संदेश लेकर विश्व के प्रत्येक कोने तक पहुंचें। अवधेशानंद गिरि ने एकात्मता का संकल्प भी दिलाया।
गौतम भाई पटेल को किया सम्मानित
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने जगतगुरु आदि शंकराचार्य के चित्र पर पुष्प वर्षा और माल्यार्पण कर किया। कार्यक्रम में गुजरात के शिक्षाविद गौतम भाई पटेल और चिन्मय मिशन के स्वामी तेजोमयानंदजी सरस्वती को शंकर अलंकरण से सम्मान प्रदान किया गया।