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सरकारी भूमि का फर्जीवाडा़ : अफसरों ने ढाई करोड़ की सरकारी भूमि निजी के नाम कर दिया, सीमांकन के विवाद में 35 साल बाद खुलासा

सरकारी गैर सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड में हेराफेरी का खेल चल रहा है। इंदौर रोड पर इंडस्ट्रियल एरिया में ढाई करोड़ रुपए के सरकारी भूमि के दस्तावेज में फर्जीवाडा़ का मामला सामने आया है।

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Rajesh Patel

Nov 13, 2025

सरकारी गैर सरकारी जमीनों के रिकॉर्ड में हेराफेरी का खेल चल रहा है। इंदौर रोड पर इंडस्ट्रियल एरिया में ढाई करोड़ रुपए के सरकारी भूमि के दस्तावेज में फर्जीवाडा़ का मामला सामने आया है। तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने सरकारी भूमि को निजी कर दिया है। इसका खुलासा राजस्व अधिकारियों की प्रारंभिक जांच में हुआ है। मामले में भू-अधीक्षक कार्यालय ने रिकॉर्ड रूम को पत्र लिखकर बंदोबस्त के समय से रिकॉर्ड तलब किया है।

सवालों के घेरे में राजस्व अधिकारियों की भूमिका

खंडवा नगर तहसील के पटवारी हल्का सूजापुर में सर्वे नंबर 78 और 79 नंबर की भूमि वर्ष 1965 में रिकॉर्ड पर शासकीय भूमि के रूप में दर्ज है। राजस्व अधिकारियों के प्रारंभिक जांच में वर्ष 1989-90 में सरकारी भूमि निजी व्यक्ति आशुतोष श्रीवास्तव के नाम दर्ज कर दी गई है। सरकारी भूमि निजी कैसे हुई इसको लेकर तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।

दो एकड़ से अधिक सरकारी भूमि में हेराफेरी

मामले में राजस्व अधिकारियों ने रिकॉर्ड खंगाला तो सामने आया कि तत्कालीन समय रिकॉर्ड में हेराफेरी की आशंका को लेकर राजस्व अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों सर्वे नंबर में दो एकड़ से अधिक भूमि में हेराफेरी की गई है। जांच के बाद रकबा घट-बढ़ सकता है।

बाजार में सरकारी भूमि की कीमत ढाई करोड़

इंड्रस्ट्रियल एरिया में भूमि के बाजार मूल्य का आंकलन ढाई करोड़ रुपए से अधिक किया है। मामले में भू-अधीक्षक कार्यालय रिकार्ड जुटाने में जुटा हुआ है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा सामने आया है। मामले में भू-अधीक्षक कैलाश सिसोदिया ने कहा कि तत्कालीन समय के रिकॉर्ड में सरकारी भूमि दर्ज है। लेकिन फाइनल जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी।

गोदाम निर्माण के साथ सूख रहा मक्का

जिस सरकारी भूमि के रेकार्ड पर हेराफेरी की गई है। उस सर्वे नंबर की भूमि पर गोदाम बना है। सीमांकन करने पहुंची टीम ने खसरे का रेकार्ड चेक किया तो वर्ष 1965-66 के रेकार्ड में सरकारी भूमि दर्ज है। उसी भूमि पर मक्का सूख रहा है और व्यक्ति के नाम दर्ज हो गई है।

सीमांकन दल के सामने दो पक्षों में नोकझोंक, गाली-गलौज

जनसुनवाई में अरविंद कौर पति सुरेंद्र सिंह पहवा ने कलेक्टर को आवेदन देकर सीमांकन की मांग की। कलेक्टर ने एसएलआर की अगुवाई में दल गठित किया। बुधवार को दल सीमांकन करने पहुंचा। सर्वे नंबर 76 का सीमांकन किया। आवेदक की भूमि विष्णु सतनामी के गोदाम में निकली। दल ने पत्थर व रंग से निशान बनाए। आवेदक पक्ष में लोगों बोले, नपती के बाद अपना कब्जा वापस लेंगे। दोनों के बीच तू-तू मैं-मैं, नोकझोंक के साथ गाली-गलौज शुरू हो गई। राजस्व कर्मचारियों ने बीच बचाव किया। सिपाही ने डायल-100 को बुलाया। सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हुई।

गोडाउन में दबी 480 वर्ग मीटर भूमि

पंचनामा रिपोर्ट में सामने आया कि 76 नंबर भूमि के 480 मीटर एरिया में विष्णु सतनामी का गोडाउन है। रेकार्ड पर सतनामी की भूमि 78 नंबर पर है। टीम ने मार्ग के दोनों छोर पर गोडाउन में कब्जा होने का चिन्ह लगाया है। इस दौरान एसएलआर कैलाश सिसोदिया, राजस्व निरीक्षक योगेश मल्तार, पटवारी, इंडस्ट्रियल कार्यालय के कर्मचारी के साथ ही पदमनगर थाने की पुलिस मौजूद रही।