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दादी का चूल्हा… किसी ने दी दाल, किसी ने चावल, किसी ने सब्जी, बना पोषण आहार
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दादी का चूल्हा… किसी ने दी दाल, किसी ने चावल, किसी ने सब्जी, बना पोषण आहार

-पारंपरिक व्यंजनो के पोषण मूल्य से अवगत कराया -कुपोषण को दूर करने पोषण सप्ताह के तहत आदिवासी अंचल में हुआ आयोजन
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खंडवा

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Manish Arora

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Updated: 6 Sep 2025, 1:11 PM IST

गांव में किसी के आंगन में दादी ने चूल्हा जलाया। कोई आटा, कोई चावल, कोई दाल, कोई सब्जी लाया। दादी ने पारंपरिक पौष्टिक भोजन बनाया, जिसे पूरे गांव ने मिलकर खाया। अवसर था राष्ट्रीय पोषण माह के अंतर्गत आदिवासी ग्राम आवलिया, नागोतार में पोषण जागरुकता कार्यक्रम का। स्पंदन समाज सेवा समिति द्वारा ग्लेनमार्क फाउंडेशन मुंबई के सहयोग से कुपोषण को दूर करने ये आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में विशेष आकर्षण ‘दादी का चूल्हा’ रहा, जिसमें पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजनों को बनाने का तरीका बताया गया। इस पहल का उद्देश्य लोगों को हमारे पारंपरिक व्यंजनों के पोषण मूल्य से अवगत कराना था। इस पूरे कार्यक्रममें गांव के ही लोगों का सहयोग रहा। उन्होंने दाल, चावल, गेहूं, सब्जियां, पूरा 50 किलो राशन गांव के लोगों ने पोषण पालकी में इक_ा किया और फिर किसी ने लकड़ी दी, किसी ने भगौना तो किसी का आंगन जहां गांव की दादी ने खाना पकाया। इसमें स्पंदन का सहयोग केवल 5 किलो चावल, 1 लीटर तेल, हल्दी रहा।

स्वस्थ्य जीवन शैली अपनाने किया प्रेरित
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संस्था प्रमुख सीमा प्रकाश उपस्थित रहीं। उन्होंने पोषण के महत्व पर प्रकाश डाला और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित किया। इस कार्यक्रम के दौरान विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें पोषण रैली, पोषण पालकी और जागरुकता सत्र प्रमुख थे। ग्रामीणों ने आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति भी दी। ग्रामीणों ने इन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। जागरुकता सत्र में पोषण विशेषज्ञों ने संतुलित आहार, गर्भावस्था के दौरान पोषण और बच्चों के लिए सही पोषण पर महत्वपूर्ण जानकारी दी। कार्यक्रम ग्रामीणों के लिए बेहद लाभदायक रहा और उन्हें पोषण के प्रति जागरूक करने में सफल रहा।