किसानों के खेतों में पानी पहुंचाने के लिए 500 करोड़ की लागत से बनी जावर उद्वहन सिंचाई योजना कुछ किसानों के लिए वरदान की जगह अभिशाप बन गई। आधी-अधूरी योजना में फूटी पाइप लाइन से ही पानी छोड़ दिया गया। जिसका नतीजा किसानों के खेतों में पकी फसल खराब हो गई। किसान शिकायत करते रहे, लेकिन एनवीडीए अधिकारियों ने नहीं सुनी। अब किसान इस मामले में सोमवार को कलेक्टर कार्यालय के सामने धरने पर बैठेंगे।
जावर उद्वहन सिंचाई योजना का लाभ मिलने की बजाय फसलें खराब करने में जरूर सहायक सिद्ध हो रही है। योजना के तहत पानी छोड़े जाने का दिखावा करने फूटी पाइप लाइन से ही पानी छोड़ दिया गया। ग्राम रोहणी में किसान हरेसिंह, शिवपाल व राधेश्यामय चौहान के खेत में से गुजर रही फूटी पाइप लाइन से लगातार 18 से 20 दिन पानी बहता रहा। किसानों ने पानी छोडऩे से मना किया, लेकिन एनवीडीए अधिकारियों ने एक नहीं सुनी। जिसके चलते तीनों किसानों के खेत में डेढ़-डेढ़ एकड़ में लगी चने की फसल जल भराव के चलते सडकऱ खराब हो गई।
जनसुनवाई में भी लगाई थी गुहार
पीडि़त किसानों ने बताया कि 20 दिन पूर्व जनसुनवाई में भी इसके लिए गुहार लगाई गई थी। एनवीडीए ने नहर बंद नहीं की। करीब 15 दिन पूर्व एनवीडीए अधिकारी किसानों के खेतों में भी पहुंचे थे और मौका मुआयना भी किया था, लेकिन पानी बंद नहीं किया, ना ही लीकेज ठीक किए। एनवीडीए ने माना कि जल भराव से फसल खराब हुई है। किसानों की फसल बरबाद होने के बाद भी इसका मुआवजा अब तक नहीं मिला है। न जिला प्रशासन, न सिंचाई विभाग किसानों की सुध तक नहीं ले रहा है। किसान हरेसिंह, शिवपाल, राधेश्याम ने बताया कि सोमवार तक उनकी समस्या का निराकरण नहीं हुआ तो वह कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।