
शहर में निगम के वैध स्लाटरहाउस के सामने ट्रेड लाइसेंस के नाम पर 33 साल से अवैध फैक्ट्री में पशुओं की चर्बी पिघलाने और मांस बेचने का कारोबार बेखौफ चल रहा था। शिकायत पर प्रशासन ने कार्रवाई की है। तीन साल पहले लाइसेंस खत्म होने के बाद भी आला अफसर और सफेदपोशों के सरपरस्ती में बेखौफ अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
मकान नंबर 45 / 111 में चर्बी बनाने का कार्य
इमलीपुरा ( बेगम पार्क के सामने परदेशीपुरा ) में यूं ही लंबे समय से चर्बी, चमड़े की फैक्ट्री संचालित नहीं हो रही है। दरअसल आला अफसरों के साथ ही इसके पीछे कई सफेदपोशों हाथ बताया जा रहा है। स्लाटरहाउस के सामने परदेशीपुरा मोहल्ले में मकान नंबर 45 / 111 में चर्बी बनाने का अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा है। तभी तो निगम, पुलिस, नापतौल, खाद्य और बिजली विभाग कार्यालय से दस्तावेज जारी हुए हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया मामला
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इंदौर की चाकलेट कंपनी समेत कई घी कंपनियों के यहां चर्बी की खपत की जा रही है। मौके पर डायरी में उनके नाम भी बरामद हुए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कनस्तर रेलवे पार्सल के लिए आए दिन भेजे जा जाते रहे। और पशुओं के खाल, सींग आदि अवशेष के ट्रक से कानपुर के लिए लोडिंग होती है। चर्बी स्थानीय स्तर पर भी बड़े पैमाने पर खपत की जा रही है।
तीन साल से लापरवाह बने रहे अफसर
निगम कार्यालय से स्लाटरहाउस से खरीद-विक्री का ट्रेड लाइसेंस रिन्युअल लगातार हो रहा है। निगम का दावा है कि 31 मार्च 2023 के बाद ट्रेड लाइसेंस जारी नहीं हुआ। हैरान करने वाली बात तो यह कि तीन साल से बगैर लाइसेंस ट्रेड लाइसेंस के नाम पर पशुओं के खाल, सींग और चर्बी बनाने की फैक्ट्री चल रही है। इसके बावजूद जिम्मेदार लापरवाह बने रहे।
33 साल से दुर्गंध के बीच जिंदगी काट रहे थे लोग
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि वह 33 साल से दुर्गंध के बीच जिंदगी काटने को विवश हैं। कई बार शिकायत की गई कोई नहीं सुना। कई स्थानीय युवाओं ने बताया कि फैक्ट्री को देखते-देखते 40 साल बीत गए। वर्ष 2017 में भी कार्रवाई हुई थी। कुछ दिन मामला शांत रहा। उसके बाद से लगातार वर्ष 2023 तक निगम से लाइसेंस जारी होता रहा।
इन विभागों की भूमिका संदिग्ध
दिलचस्प यह कि तीन साल से अवैध कारोबार चल रहा है। निगम, पुलिस और खाद्य एवं औषधि, नापतौल, बिजली विभाग के जिम्मेदार तमाशबीन बने रहे। दरअसल, अवैध फैक्ट्री में बिजली विभाग का मीटर लगा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 33 साल इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है।
मोहल्ले के लोग लंबे समय से थे परेशान
मोहल्ले में रहने वाले शेष फारीक, शफीक, शेष मोहम्मद, अर्शी, आयसा, जावेद आदि करीब दो दर्जन लोग निगम, पुलिस और प्रशासन को आवेदन दिया है। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि पशुओं अपशिष्ट की गंदगी से बच्चे, बुजुर्ग बीमार आए दिन बीमार रहते हैं। कई बार शिकायत की कोई सुनवाई नहीं हुई। गोदाम के आस-पास उनके रिश्तेदार रहते हैं। अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर निगम लाइसेंस जारी करता रहा। मामले की शिकायत सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर से की गई।
खाद्य पदार्थों में पशुओं के चर्बी का उपयोग का शक
खाद्य विशेषज्ञों और होटलों में कार्य करने वाले कई खानशामा का कहना है कि पशुओं की चर्बी का उपयोग भूनने, तलने जैसे फ्राइज, स्नैक्स और बेकारी उत्पादों पेस्ट्री, बिस्कुट में स्वाद और बनावट के लिए किया जाता है। साथ ही प्रसंस्कृत मांस, नकली घी समेत कुछ प्रकार की मिठाइयों आदि खाद्य पदार्थों में किया जाता है।