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क्षमावाणी पर्व… क्षमा कर देना बड़ी बात नहीं है किंतु क्षमा मांग लेना बहुत बड़ी बात -विश्रुत सागर जी
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क्षमावाणी पर्व… क्षमा कर देना बड़ी बात नहीं है किंतु क्षमा मांग लेना बहुत बड़ी बात -विश्रुत सागर जी

संतों ने एक दूसरे से मांगी क्षमा, निकाली श्रीजी की शोभायात्रा -दिगंबर जैन समाज का सामूहिक क्षमापना पर्व, हुई शांतिधारा, अभिषेक -छोटों ने बड़ों के पैर छुए, बड़ों ने एक-दूसरे गले मिलकर कहा मिच्छामी दुक्कड़म
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खंडवा

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Manish Arora

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Updated: 9 Sep 2025, 12:01 PM IST

दिगंबर जैन समाज द्वारा दशलक्षण पर्वाधिराज पर्युषण पर दस दिन तक तप, आराधना की गई। पर्व के समापन पर सामूहिक क्षमावाणी पर्व सोमवार को मनाया गया। सकल दिगंबर जैन समाज एवं मुनि सेवा समिति के तत्वावधान में बजरंग चौक स्थित महावीर दिगंबर जैन मंदिर परिसर में सामूहिक क्षमा वाणी महोत्सव का आयोजन हुआ। मंगलाचरण भगवान का अभिषेक शांति धारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, समाज के वरिष्ठ जनों का सम्मान एवं उपवास करने वाले तपस्वियों का अभिनंदन कर सभी ने कएक दूसरे से क्षमा मांगी।

उत्तम क्षमा धर्म पर उपाध्याय विश्रुत सागर महाराज के प्रवचन हुए। उपाध्याय विश्रुत सागर महाराज ने कहा कि जब तक मन की कटुता दूर नहीं होगी, तब तक क्षमावाणी पर्व मनाने का कोई अर्थ नहीं है, अत: जैन धर्म क्षमाभाव ही सिखाता है। हमें भी रोजमर्रा की सारी कटुता, कलुषता को भूलकर एक-दूसरे से माफी मांगते हुए और एक-दूसरे को माफ करते हुए सभी गिले-शिकवों को दूर कर क्षमा-पर्व मनाना चाहिए। दिल से मांगी गई क्षमा हमें सज्जनता और सौम्यता के रास्ते पर ले जाती है। क्षमावाणी पर्व पर सुबह श्रीजी की शोभायात्रा भी निकाली गई। मंदिर में अभिषेक व शांतिधारा भी मुनि ससंघ के सानिध्य में संपन्न हुई। सामूहिक क्षमावाण पर्व पर छोटों ने बड़ों के पैर छूकर, बड़ों ने एक दूसरे से गले मिलकर मिच्छामी दुक्कड़म कहते हुए क्षमा मांगी।