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मुख्यमंत्री बोले…ओंकारेश्वर बन रहा है एकात्मता का केंद्र, नई पीढ़ी को अद्वैत से जोड़ने का अभिनव प्रयास
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मुख्यमंत्री बोले…ओंकारेश्वर बन रहा है एकात्मता का केंद्र, नई पीढ़ी को अद्वैत से जोड़ने का अभिनव प्रयास

मुख्यमंत्री डॉ. यादव, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती के संग आचार्य शंकर प्रकटोत्सव में पहुंचे, मुख्यमंत्री ने ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में पांच दिवसीय प्रकटोत्सव का मंत्रोच्चार के साथ शुभारंभ किया।

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Rajesh Patel

Apr 18, 2026

मुख्यमंत्री डॉ. यादव, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती के संग आचार्य शंकर प्रकटोत्सव में पहुंचे, मुख्यमंत्री ने ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में पांच दिवसीय प्रकटोत्सव का मंत्रोच्चार के साथ शुभारंभ किया।

भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का आधार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीरामचन्द्र जी त्रेतायुग में मंदाकिनी नदी तट पर चित्रकूट धाम पधारे और द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण शिक्षा ग्रहण करने उज्जैयिनी स्थित सांदीपनि आश्रम पधारे। उन्होंने कहा कि सनातन के कठिनकाल में केरल के कालड़ी से चले 8 वर्षीय बालक शंकर ओंकारेश्वर पधारे, जहां परम पूज्य गुरूगोविंदपाद जी के आशीर्वाद से आदि शंकराचार्य बनकर सनातन धर्म की धारा को अविरल रूप से बहाने का आधार प्रदान किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की पावन भूमि पर भगवान श्री राम, श्री कृष्ण और आदि शंकराचार्य के चरण पड़े, जिससे मध्यप्रदेश की पावन भूमि धन्य हो गई। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य का दर्शन भारतीय संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक एकता का आधार है।

दीनदयाल के विचारों में भी एकात्मता के भाव

मुख्यमंत्री कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में राज्य सरकार सनातन संस्कृति के सिद्धांतों के अनुरूप समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों में भी एकात्मता के भाव की अभिव्यक्ति होती है। इसी क्रम में राज्य सरकार अंत्योदय के सिद्धांतों के क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पंच दिवसीय एकात्म पर्व में पधारे संत, मनीषी, विद्ववान एकात्मकता के वैश्विक संदेश को रेखांकित करेंगे। यह पर्व आधुनिक समाज और नई पीढ़ी को अद्वैत से जोड़ने का अभिनव और सफल प्रयास सिद्ध होगा।

प्राणी मात्र में आत्मा रूपी जो तत्व विद्मान है

श्री द्वारका शारदा पीठ के जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी श्री सदानंद सरस्वती ने एकात्म धाम की संकल्पना को सराहा। उन्होंने कहा कि प्राणी मात्र में परमात्मा का दर्शन करने वाला ही एकात्मता सिद्ध कर सकता है। व्यक्ति में एकात्म बोध होना आवश्यक है। ब्रह्म, भगवान और आत्मा तीनों एक हैं। प्राणी मात्र में विद्यमान आत्म तत्व का ज्ञान ही एकता का आधार है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति, संस्कारों से समृद्ध होती है। प्राणी मात्र में आत्मा रूपी जो तत्व विद्मान है, वही एकात्म है। एकात्मा को सिद्ध करने के लिए वेदों की आवश्यकता है।

मनुष्य का शरीर, जिसमें कई अंग हैं, लेकिन चेतना एक है

विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की उपाध्यक्ष निवेदिता भिड़े ने कहा कि हम सभी की आत्मा एक है, शरीर मात्र एक साधन है। मनुष्य शरीर, एकात्म का सबसे सुंदर उदाहरण है, शरीर में कई अंग हैं, लेकिन चेतना एक है। संपूर्ण विश्व में हम सभी ईश्वर की कोशिकाओं की तरह हैं, इन कोशिकाओं का प्राण ईश्वर ही है, जो सर्वथा एक है। हमारे वेदों में विद्यमान क्वांटम फिजिक्स और पर्यावरण के सिद्धांतों को विश्व आज समझ रहा है। दुनिया के लोग कहते हैं कि अगर मानव समाज की रक्षा करनी है तो भारत के वेद, उपनिषदों का अध्ययन करना होगा।

सनातन धर्म को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया

चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन वेलियानाड केरल से पधारे स्वामी शारदानंद सरस्वती ने कहा कि आदि शंकराचार्य विश्वगुरु हैं, उन्होंने संन्यास ग्रहण कर सनातन धर्म को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। आचार्य शंकर ने अद्वैत सिद्धांत के माध्यम से जीवन के लिए उचित पथ का दर्शन कराया।

शंकर दूत के रूप में संकल्प लेंगे 700 से अधिक युवा

एकता न्यास स्वामी श्री वेदतत्वानंद पुरी ने कहा कि आचार्य शंकर ने अद्वैत के सिद्धांत से विश्व का परिचय कराया। भारत भूमि को हमारे सिद्ध महापुरुषों ने तीर्थ बनाया। इनके योगदान को पांच दिवसीय आयोजन में सामने लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम हमारी परंपराओं पर चलते हुए विश्व शांति के लिए अद्वैत के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। पांच दिवसीय कार्यक्रम में शंकर दूत के रूप में 700 से अधिक युवा संकल्प लेंगे।

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