राष्ट्रीय विज्ञान दिवस हर साल 28 फरवरी को मनाया जाता है। उत्कृष्ट विद्यालय में अंग्रेजों के जमाने की तीन प्रयोगशालाएं आज भी जिंदा हैं। छात्र बायो, फिजिक्स और केमिस्ट्री की प्रयोगशाला में प्राकृतिक और जीवों की संरचनाओं को मॉडल के माध्य से उसके पद्धति की बारीकियों का अध्ययन कर रहे हैं।
उत्कृष्ट विद्यालय में 124 साल पुरानी लैब
उत्कृष्ट स्कूल खंडवा में हाई स्कूल और हायर सेकंडरी के छात्रों को विज्ञान के प्रैक्टिकल को समझने में 124 साल के उपकरण भी प्रेरित कर रहे हैं। इस प्रयोगशाला में 33 से अधिक माइक्रो स्कोप रखे हैं। यहां आज भी गैल्वेनोमीटर समेत कई उपकरण मेड इन ब्रिटेन के हैं। बायो की लैब में मानव, मेंढक और कींड़ों की बात करते तो अब उनके मॉडल के आधार पर जीव विज्ञान का प्रैक्टिकल किया जा रहा है।
जीव विज्ञान :
डीएनए के माध्यम से दूसरी पीढ़ी में पहुंच रही अनुवांशिक सूचना
जीव विज्ञान की प्रयोगशाला में जीवों की संरचनाओं को समझने के लिए छात्र प्रैक्टिकल कर रहे हैं। विषय विशेषज्ञ भरत भूषण गाठिया छात्रों को पीओपी के डीएनए मॉडल से छात्रों को समझाया कि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक अनुवांशिक सूचनाएं डीएन के माध्य से पहुंचती हैं। इस दौरान उन्होंने मानव संरचना में सिकल सेल के मरीजों का उदाहरण दिया।
भौतिक विज्ञान :
गैल्वेनो मीटर करंट की धारा को दे रहा डायरेक्शन
भौतिक विज्ञान यानी केमिस्ट्री की प्रयोगशाला में अंग्रेजों के जमाने के कई उपकरण रखे हैं। प्रयोगशाला में मेड इन ब्रिटेन के गैल्वेनोमीटर से विषय विशेषज्ञ नितेश लाड ने छात्रों को विद्युत की धारा मापने के पद्धति की बारीकियां बताई। उन्होंने छात्रों बताया कि गैल्वेनों मीटर ब्रिटेन का 100 साल से अधिक पुराना यंत्र है। विषय विशेषज्ञ ने छात्रों को बताया कि गैल्वेनाे मीटर चुंबकीय क्षेत्र में कुंडल से प्रवाह होने वाली विद्युत धारा के प्रतिक्रिया में डायरेक्शन तय करता है। यानी दिशा बताता है।
रसायन विज्ञान :
अमरूद में पकने के साथ बढ़ने लगती है आक्सालेट की मात्रा
रसायन विज्ञान की प्रयोगशाला में प्रैक्टिकल के जरिए पौधों की विभिन्न प्राकृतिक प्रक्रिया को समझा जाता है। विषय विशेषज्ञ परमजीत कौर मौंगा, शालिनी सकवार ने छात्रों को परीक्षा में प्रैक्टिकल का मंत्र दिया। इस दौरान उन्होंने अमरूद के पकने की प्रक्रिया को समझाते हुए सी-2, ओ-2 (4) की भूमिका को समझाया। जानकारी दी कि अमरूद के पकने के साथ ही उसमें आक्सालेट बढ़ने लगता है। इसी तरह पालक, चुंकदर, चाकलेट, बीन्स आदि पौधों के आधारित खाद्य पदार्थों में मिलता है।