शुक्रवार को यूपीएससी की सिविल सेवा परिक्षा 2025 के परीक्षा परिणाम घोषित हुए है। जैसे ही रुपल के 43वीं रैंक हासिल करने रिजल्ट सामने आया, परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। माता-पिता व भाई के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सभी ने पिता ने बेटी को गले से लगाया तो मां उसे दुलारती रही। पिता ने मिठाई खिलाकर बेटी को बधाई दी।
पहले प्रयास में 512वीं रैंक, फिर भी नहीं छोड़ा सपना
रुपल ने बताया कि वर्ष 2024 में यूपीएससी परीक्षा में उनकी 512वीं रैंक आई थी। उस समय उनका चयन तो हो गया था, लेकिन उनका सपना आइएएस बनने का था। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने मुंबई में निजी कंपनी की नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह से पढ़ाई में जुट गईं। परिवार के सहयोग और अपनी लगन के दम पर उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और इस बार ऑल इंडिया 43वीं रैंक हासिल कर अपना सपना पूरा किया।
रोजाना 7 से 10 घंटे तक की पढ़ाई
रुपल ने अपनी तैयारी के दौरान नियमित रूप से पढ़ाई की। उन्होंने बताया कि कभी 7 घंटे तो कभी 10 घंटे तक पढ़ाई करती थीं। कई बार ऐसा भी हुआ कि मन पढ़ाई करने का नहीं होता था, लेकिन उस दिन भी उन्होंने कम से कम 4 से 5 घंटे पढ़ाई जरूर की। रुपल का मानना है कि केवल स्मार्ट वर्क से ही नहीं बल्कि कड़ी मेहनत से ही यूपीएससी जैसी परीक्षा में सफलता मिलती है।
परिवार का पूरा सहयोग बना सफलता की ताकत
रुपल अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को भी देती हैं। उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान परिवार ने उन्हें घर के किसी काम में नहीं लगाया और पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान देने दिया। माता-पिता हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखते थे। उनके पिता धनंजय जायसवाल का कहना है कि बेटी ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प से आइएएस बनने का सपना साकार किया है, जिस पर पूरे परिवार को गर्व है। आइएएस बनने का सपना पूरा हुआ