जिले के नंदकुमार सिंह चौहान शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में दिव्यांग प्रमाणपत्र से एडमिशन लेने वाली भोपाल निवासी रिशु भारती पिता मनोज कुमार का एमबीबीएस में एडमिशन भले ही निरस्त हो गया है लेकिन एडमिशन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए है। इससे पहले प्रदेश में इस तरह से कोटे से फर्जी प्रमाणपत्र यूपी के गिरोह से बनवाकर एडमिशन लेने का प्रयास किया। जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो गई। प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों को सभी संवेदनशील श्रेणी वाले दस्तावेजों की फिर से जांच के निर्देश दिए गए।
जिसके बाद जिले के मेडिकल कालेज में हलचल मची थी, लेकिन छात्रा भारती द्वारा जमा किया दिव्यांग प्रमाणपत्र को तिलस्म को फिर भी टीम नहीं तोड़ पाई। इसके चलते उन्होंने इसे पुख्ता करने के लिए बीएचयू भेज दिया। बीएचयू प्रबंधन ने इस प्रमाणपत्र को फर्जी बताया। हस्ताक्षर व छात्रा भी उनके यहां की नहीं है न ही उसे जानते हैं बताया।
मेडिकल कालेेज प्रबंधन ने थाने में दिया आवेदन
नंदकुमार सिंह चौहान शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में राज्य स्तरीय काउंसिलिंग नीट यूजी 2025 के माप राउंड में अभ्यर्थी रिशु भारती ने दिव्यांग कोटे से सीट आवंटित हुई थी। छात्रा ने 7 नवंबर को कालेज में प्रवेश लेकर मूल दस्तावेज जमा किए थे। जिसमें दिव्यांग प्रमाण पत्र नंबर 2025-अगस्त-001628 जमा किया था। इस दिव्यांग प्रमाण पत्र की जांच संबंधित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी से कराई गई। जांच में प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। छात्रा पर केस दर्ज किया जाए।
यूपी के भदोही से पकड़ाया गिरोह
एमबीबीएस में फर्जी प्रमाणपत्र यूपी के गिरोह ने बनाए। अब तक मेरठ, सहारनपुर, बलिया, भदोही, वाराणसी, गाजियाबाद, आगरा, बुलंदशहर से इस तरह के फर्जी प्रमाणपत्र बनाने की जानकारी सामने आई है। वहीं भदोही से एक गिरोह भी पकड़ाया है। इधर मोघट पुलिस ने भी रिशू भारती पर प्रकरण दर्ज करने की तैयारी कर ली है। मेडिकल कालेज से मामले से जुड़े ओरिजनल दस्तावेज मांगें है। जिसके बाद पुलिस इस मामले में केस दर्ज कर सकती है।