जीवन का मूल मंत्र है आपके जैसे विचार होते हैं वैसा ही आचार होता है। “स “अक्षर से स्वर्ग और सकारात्मक बना है। वहीं न अक्षर से नर्क और नकारात्मकता बने हैं। याद रखिए जिंदगी में हम जो करते हैं वही लौट कर हमारे पास आता है। हम हाथ उठा कर आसमान में कीचड़ उछालेंगे तो हमारे ऊपर कीचड़ ही गिरेगा और हम आसमान में गुलाब जल उछालेंगे तो हमारे ऊपर गुलाब जल ही गिरेगा।
व्यक्ति स्वयं ही खुद का सुधार सकता है
यह बात राष्ट्र संत ललित प्रभ महाराज ने शुक्रवार को पुरानी अनाज मंडी में जीने की कला विषय पर प्रवचन माला के अंतिम दिन उपस्थित जनों से कही। सकल जैन संघ और युवा महासंघ के तत्वावधान में तीन दिवसीय प्रवचन माला के अंतिम दिन राष्ट्र संत ललित प्रभ महाराज ने कहा कि दुनिया में एक ही व्यक्ति है जो इंसान को सुधार सकता है और वह व्यक्ति स्वयं इंसान है। जो अपने आप को सुधार सकता है। गुरुदेव ने दृष्टांत देते हुए कहा की रामायण में कैकेई राम के सानिध्य में रहने के बाद भी सुधर नहीं पाई, उधर विभीषण भी रावण के सानिध्य में रहकर बिगड़ नहीं पाया तो यह व्यक्ति की स्वयं की इच्छा शक्ति मजबूत होती है।
अपने 4जी को मानों, कभी काम नहीं रुकेगा
राष्ट्र संत ललित प्रभ ने कहा मोबाइल का 4जी क्या काम का इसका तो कभी भी नेटवर्क चला जाता है। मैं बताता आपको वो 4जी जिसका कभी नेटवर्क नहीं जाता और वो 4जी है पहला माताजी, दूसरा पिताजी, तीसरा गुरुजी, चौथा प्रभु जी, यह वो 4जी है जिसे आप मानेंगे तो जिंदगी में आपका काम कभी नहीं रुकेगा। महाराज ने कहा कि किसी भी घर की ताकत दौलत और शौहरत नहीं, प्रेम और मोहब्बत हुआ करती है। प्रेम के बिना धन और यश व्यर्थ है। जिस घर में प्रेम है वहां धन और यश अपने आप आ जाता है।
जिस घर में प्रेम, वह धरती का स्वर्ग
महाराज ने कहा कि जहां सास-बहू प्रेम से रहते हैं, भाई-भाई सुबह उठकर आपस में गले लगते हैं और बेटे बड़े-बुजुर्गों को प्रणाम कर आशीर्वाद लेते हैं, वह घर धरती का जीता-जागता स्वर्ग होता है। उन्होंने कहा कि अगर भाई-भाई साथ है तो इससे बढकऱ मां-बाप का कोई पुण्य नहीं है और मां-बाप के जीते जी अगर भाई-भाई अलग हो गए तो इससे बढकऱ उस घर का कोई दोष नहीं है। प्रवचनों से प्रभावित होकर उपस्थितजनों ने प्रतिदिन माता-पिता को पांचांग प्रणाम करने का संकल्प लिया।
ये रहे प्रवचन में उपस्थित
प्रवचन माला में महापौर अमृता यादव, विधायक कंचन तनवे, भाजपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर, आयोजन समिति के विजय जैन, रोहित मेहता, अभय जैन, तपन डोंगरे, नवनीत बोथरा, मेघराज जैन वाडीलाल पटेल, ललित पटेल, देव बोरा, राखी बोरा, शीतल चोपड़ा, वैशाली मेहता, प्रिया जैन आदि उपस्थित रहे। इस दौरान प्रचार मंत्री चंद्र कुमार सांड को संत ललित प्रभ, डॉ. शांति प्रिय सागर महाराज और आयोजन समिति ने मोतियों की माला और ज्ञान पुष्प देकर सम्मानित किया। प्रवचन माला के बाद संतों का छैगांवमाखन की ओर विहार हुआ। रात्रि विश्राम छैगांवमाखन स्थित भगवती पैलेस में हुआ।