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देखे वीडियो -कहार, गुरव समाज में पत्तल परोसने से लेकर उठाने तक लगी हजारों की बोली

-सामाजिक समरसता का उदाहरण बने भंडारे, तीन साल तक भंडारे की एडवांस बुकिंग -गणगौर पर्व के समापन पर गुरव समाज, कहार समाज में हुए भंडारे

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खंडवा

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Manish Arora

Mar 24, 2026

बदलते समय के साथ भंडारों का स्वरूप भी बदला। अब भंडरों में भोजन परोसा तो जाता है, लेकिन जूठी पत्तल प्रसादी पाने वाले को खुद उठाना होती है। गणगौर पर्व पर दो समाजों में होने वाले भंडारे सामाजिक समरसता के अनुठे उदाहरण है। यहां जूठी पत्तल उठना शर्म नहीं, बल्कि गर्व का विषय है, जिसके लिए बकायदा समाजजन बोली तक लगाते है। सोमवार को गणगौर पर्व पर कहार समाज और गुरव समाज में ये परंपरा देखने को मिली।