
जनसुनवाई में इंसाफ मांगने आए किसान और उसके पुत्र को इंसाफ तो मिला नहीं, उल्टे सिटी मजिस्ट्रेट ने प्रतिबंधात्मक धारा 151 के तहत जेल भेज दिया। मामला मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान हुआ है। घटना पर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई और शाम को जब किसान की जमानत कराने पहुंचे तो सिटी मजिस्ट्रेट ने जमानत देने से इंकार कर दिया। इसके विरोध में कांग्रेसी कलेक्ट्रेट परिसर में ही धरने पर बैठ गए। रात को पीसीसी चीफ ने इस मामले में कलेक्टर से बात की, जिसके बाद दोनों को जमानत दी गई। हालांकि जेल नियमों के अनुसार बुधवार सुबह दोनों को रिहा किया जाएगा।
ऐसे बिगड़ा मामला
आवेदक की सुनवाई कर कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने अपर कलेक्टर केआर बड़ोले को निर्देश दिए कि नियमानुसार कार्रवाई करें। इस बीच किसान अचानक उग्र हो गया और आरोप लगाने लगा कि कोई सुनवाई नहीं हो रही, सब रिश्वत लेकर काम कर रहे है। जन सुनवाई में मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने किसान और उसके पुत्र को रोका तो दोनों हंगामा करने लगे। जिसक बाद सुरक्षाकर्मियों ने सभाकक्ष से बाहर किया। इस बीच सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने दोनों पिता-पुत्र पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करने के लिए कोतवाली पुलिस को भी बुला लिया। देर शाम तक दोनों पर कार्रवाई कर जेल भेज दिया गया।