यूनेस्को द्वारा घोषित 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पर शनिवार को शहर में भी आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिली। आदिवासी समाज, आदिवासी छात्र संगठन, जयस ने रैली का आयोजन किया। आदिवासी वेशभूषा में, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, डीजे की धून पर आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति देते युवा चल रहे थे। रैली के समापन पर पुरानी अनाज मंडी में मंचीय कार्यक्रम में आदिवासी समाज के महापुरुषों की पूजा कर किया गया।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शनिवार सुबह 11.30 बजे सर्व आदिवासी समाज, संगठन के बैनर तले स्टेडियम ग्राउंड से रैली निकाली गई। रैली में युवक-युवतियां पारंपरिक वेशभूषा सहित आधुनिक वेशभूषा में शामिल हुए। डीजे और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ताल पर युवाओं ने जमकर नृत्य किया। रैली इंदिरा चौक, बस स्टैंड, घंटाघर, बांबे बाजार, निगम तिराहा, अस्पताल चौक पर पहुंची। यहां बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद रैली जलेबी चौक होते हुए तीन घंटे का सफर पूरा कर 2.30बजे अनाज मंडी पहुंची। यहां पर मंचीय आयोजन में आदिवासी समाज के भगवान बड़ादेव व महापुरुषों की पूजा अर्चना कर कार्यक्रम शुरू किया गया।
अच्छी शिक्षा से ही समाज का उद्धार
छात्रसंघ के मनोज ओसवाल ने बताया महारैली के बाद पुरानी अनाज मंडी में मंच कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता क रूप में टीआर ब्राह्मने ने कहा कि आदिवासी समाज के युवा अच्छे से शिक्षा प्राप्त कर अच्छे पदों पर जाकर कार्य करें। अच्छी शिक्षा से ही समाज का उद्धार होगा। इसके साथ ही नवनियुक्त डीएसपी रानू मोजले सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन पीयूष मोजले ने किया, आभार प्रेम अजनारे ने माना। इस अवसर पर अंकुश मोर,े भैरव नार्वे, मोहन मोगर,े रूपेंद्र सोलंकी, सचिन बारे, राहुल कनाडे, चंदू कनेश, कुंदर कावरे, संजय कन्नौजे, नवल कनेश आदि के साथ आदि सामाजिक कार्यकर्ता व बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।