स्वामी जगदीशदास (हरिद्वार) ने मधुरमय वाणी से संगीतमय आयोजन किया। कथा के प्रथम दिवस सुबह 7 बजे से स्वामी जगदीशदास व महन्त श्यामदास उदासी ने मिलकर सावन सोमवार के मौके पर रुद्राभिषेक किया। सुबह 9 बजे लक्ष्मीनारायण मन्दिर से कलशयात्रा शुरू हुई और मुख्य मार्गों से होती हुई सतगुरु बालकधाम उदासीन आश्रम सनातन मन्दिर पंहुची। कलश का पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। कलशयात्रा में 151 कलश महिलाओं ने सिर पर लेकर कथा स्थल पहुंची। इसके बाद सतगुरु बालक धाम आश्रम में कलश स्थापना कर गणपति व देवी देवताओं की स्थापना की गई। दोपहर 2 बजे कथा प्रारंभ होने से पूर्व गणपति की स्तुति व हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। इसके बाद विधिवत मंत्रोच्चार कर कथा आरम्भ की गई। कथा वाचक ने भागवत पुराण किस प्रकार, किस के द्वारा की जानी चाहिए यह समझाया। कथा में राजा परीक्षित को किस प्रकार से कलयुग का मिलना, ऋषि की बाण मारकर हत्या समेत अन्य प्रसंग सुनाए। कथा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रदेश मंत्री रामस्वरूप चौधरी भी शामिल हुए। कथा के बाद आरती हुई। इसमें मूलचन्दानी, छतवानी, हासानी, बेलारामानी समेत अहिलानी परिवार शामिल रहे। अन्त में श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारी की धुनी के साथ कथा को विराम दिया गया।