बोरगांव. ग्राम आलोर में प्रसिद्ध लिंगेश्वरी माता दरबार का द्वार सुबह 5 बजे मंदिर के पुजारियों द्वारा खोला गया। मंदिर की साफ -सफ ाई के पश्चात ताजे दुध और चम्पा फु ल से विधिवत पुजा अर्चना किया गया। हर वर्ष की भाँति इस वर्ष जब गुफ ा का द्वार खोला गया तो वहाँ पर पिछले बार बिछाए हुए रेत में बिल्ली एवं मानव के पैरो के निशान देखे गए। समिति व पूर्वज ग्रामीणों के मान्यता के अनुसार बिल्ली एवं मानव पदचिन्ह के निशान का मतलब क्षेत्र में इस वर्ष हिंसा एवं अनहोनी का संकेत देते हैं। पुजारियों द्वारा विधिवत पुजा अर्चना के पश्चात क्षेत्र की सुख शांति खुशहाली और भक्तजनों ंंकी मन्नत पुरी करने के लिए पुजारियो द्वारा देवीमाँ से विनती कर चांदी के बने मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थापित कर पुजा के बाद भक्त जनों के दर्शन के लिए खोला गया।
देश के कोने-कोने से आते हैं श्रद्धालु
एक दिन पुर्व से भक्तों का आना शुरू हो चुका था जिसमे बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, झारखण्ड, आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र और स्थानीय राज्य के कोने कोने से श्रद्धालु यहां मन्नत मांगने पहुंचे थे। लिंगेश्वरी माई के दर्शन करने हजारो भक्त पहुंचे थे।
305 मन्नत पूर्ण दंपत्ति ने संतान के साथ आकर मंदिर में माथा टेका
जिन 305 श्रद्धालुओं के मन्नत पूर्ण हुए वो जोड़ों ने अपने संतानों के साथ माता का दर्शन करने पहुंचे। इसमें से रायपुर निमोड़ा निवासी लोकेश साहू एवं ललिता साहू दोनों पति-पत्नी को शादी के 19 वर्ष बाद भी संतान की प्राप्ति नहीं हुई थी। इनका कहना है कि इन्होंने बच्चे की प्राप्ति के लिए कई उपाय किए लेकिन उन्हें कहीं सफलता नहीं मिली जब किसी से उक्त मंदिर की चमत्कार सुनकर पिछले वर्ष मंदिर में आकर मन्नत किए तत्पश्चात उन्हें इसी वर्ष जुड़वा 2 पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। इसी तरह रायपुर निवासी शत्रुघ्न साहू को शादी के 16 साल बाद एवं कांकेर के निवासी प्रकाश नेताम को शादी के 10 वर्ष बाद, राजनांदगांव निवासी जय प्रकाश साहू को शादी के 16 साल बाद एवं भिलाई निवासी दो सगी बहन एम भाग्यवती व एम सरिता को शादी के 8 वर्ष व 11 वर्ष बाद संतान की प्राप्ति हुई जिन्होंने अपनी संतान को लेकर इस वर्ष माता के दर्शन में आए।