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प्रधानमंत्री बोले, यह सदन का सौभाग्य है कि बिरला दूसरी बार स्पीकर के आसन पर विराजमान हो रहे हैं
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प्रधानमंत्री बोले, यह सदन का सौभाग्य है कि बिरला दूसरी बार स्पीकर के आसन पर विराजमान हो रहे हैं

कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला दूसरी बार फिर लोकसभा अध्यक्ष बन गए हैं। बिरला के पुन: स्पीकर बनने पर शिक्षा नगरी में खुशी का माहौल है। संसदीय क्षेत्र में जगह-जगह कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर खुशी मनाई।
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कोटा

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Haboo Lal Sharma

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Updated: 26 Jun 2024, 12:14 PM IST

कोटा-बूंदी सांसद ओम बिरला दूसरी बार फिर लोकसभा अध्यक्ष बन गए हैं। बिरला के पुन: स्पीकर बनने पर शिक्षा नगरी में खुशी का माहौल है। संसदीय क्षेत्र में जगह-जगह कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी कर खुशी मनाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में लोकसभा अध्यक्ष के लिए कहा,”यह सदन का सौभाग्य है कि आप दूसरी बार इस आसन पर विराजमान हो रहे हैं… आपको मेरी और इस पूरे सदन की तरफ से बहुत शुभकामनाएं… अमृतकाल के इस महत्वपूर्ण कालखंड में दूसरी बार इस पद पर विराजमान होना बहुत बड़ा दायित्व आपको मिला है… हम सबका विश्वास है कि आप आने वाले 5 साल हम सबका मार्गदर्शन करेंगे..।

बिरला 19 जून, 2019 को सर्वसम्मति स्पीकर बने थे

बिरला भारत की 17वीं लोक सभा के अध्यक्ष हैं। श्री ओम बिरला का जन्म 23 नवंबर, 1962 को कोटा, राजस्थान में हुआ। ओम बिरला 19 जून, 2019 को सर्वसम्मति से 17वीं लोक सभा के अध्यक्ष निर्वाचित हुए।

राजनीतिक सफरनामा

बिरला वर्ष 2003, 2008 व 2013 में तीन बार विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2014, 2019 तथा 2024 में कोटा-बूंदी लोक सभा संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए। राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। सहकारी नेता के रूप में देश में अपनी विशेष पहचान काम बनाई थी। संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष, युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष समेत कई अहम पदों पर रह चुके हैं। संसदीय सचिव भी रहे चुके है। एक साधारण परिवेश से निकल कर देश की सर्वोच्च जनप्रतिनिधि संस्था के अध्यक्ष पद पर पहुंचने की बिरला की यात्रा एक आदर्श और प्रेरक यात्रा है। वे सादा जीवन उच्च विचार के श्रेष्ठ उदाहरण हैं। जनता से उनका जुड़ाव और उनके प्रति समर्पण उन्हें एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि बनाता है।

समदर्शी लोक सभा अध्यक्ष

बिरला की अध्यक्षता में लोक सभा ने कार्य उत्पादकता के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। सदन में चर्चा-संवाद को बढ़ावा देने से भारतीय लोकतंत्र का सशक्तीकरण हुआ है। सदन में उनके कार्य संचालन और आचरण ने अध्यक्ष पीठ की गरिमा को और अधिक बढ़ाया है।