
नागौर. वर्ष 2007 में शराब से मामा के मौत होने का बेहद गहरा असर अमनदीप सिंह खालसा पर पड़ा। यही से मन में प्रेरणा जगी की वह देश के विभिन्न राज्यों में घूमकर लोगों को नशा से मुक्त कराने का कार्य करेंगे। इसी सोच के साथ वर्ष 2008 में साईकिल उठाई और घर से निकल गए। लोगों को नशा से छोडऩे के लिए प्रेरित करने में जुट गए। बंगलोर के रहने वाले अमनदी सिंह बताते हैं कि अब तक नौ हजार से लोगों को नशा छुड़ा चुके हैं। वर्ष 2008 से अब तक इस मुहिम में 14 साईकिलें इस्तेमाल हो चुकी हैं। कुल 26 राज्यों की यात्रा कर चुके हैं। सोमवार को नागौर पहुंचे तो सुगन सिंह स्थित गुरुद्वारा में मत्था टेका, और लोगों से मिले तो अपनी मुहिम के बारे में बताया। गुरुद्वारा आए लोगों ने मुहिम को सराहा। इस मौके पर अमनदीसिंह खालसा से बातचीत हुई तो बोले की नशा एक केवल नशा करने वाले को नहीं, बल्कि पूरे परिवार के खत्म कर देता है।
कई भाषाओं के जानकार
अमनदीप सिंह खालसा हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, कन्नड़ एवं मलयालम के साथ अंग्रेजी भाषा के अच्छे जानकार हैं। जिस भी क्षेत्र में पहुंचते हैं, प्रयास करते हैं उससे उसी की भाषा में ही बातचीत करें। बताते हैं कि खुद के गृह जनपद में उनको नशे की मुहिम के खिलाफ कुछ जगहों पर विरोध की स्थिति का सामना करना पड़ा, लेकिन वह अडिग रहे। इससे उनको सफलता भी मिली। सफलता मिली तो वह फिर राज्य के विभिन्न जिलों के भ्रमण में निकल गए। तभी से यह लगातार मुहिम चल रही है। इसी मुहिम के तहत वह राजस्थान के नागौर में पहुंचे हैं। अब यहां से विभिन्न जिलों में विशेषकर नशा प्रभावित जिलों से होते हुए और अपने गंतव्यों के लिए रवाना हो जाएंगे।
गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में आया नाम
अमनदीप सिंह खालसा बताते हैं कि वह अब तक तीन लाख किलोमीटर की यात्रा साईकिल से तय कर चुके हैं। सर्वाधिक यात्रा करने के साथ ही नशे की प्रवृति के खिलाफ उनकी मुहिम ने गिनीज ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में अपना स्थान बनाया है। इसी के चलते उनको अमरीका से गिनीज की ओर से एक लाख डालर का चेक मिला है। इस राशि से वह बंगलोर में ही बच्चों के लिए स्कूल खोलेंगे, और नि:शुल्क पढ़ाई कराएंगे।
नौकरी छोड़ी, घर से मिला सहयोग
अमनदीप सिंह कहते हैं कि वह पेशे से टीचर रहे। उनकी पत् नी भी टीचर है। इस मुहिम के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। एक लडक़ा अमरीका में डॉक्टर है, और एक पुत्री की शादी कर चुके हैं। इस प्रयास में उनको अपनी पत्नी एवं पुत्र दोनों का ही बराबर सहयोग मिलता रहा है। बताते हैं कि वह चाय तक होटल या ढाबे में नहीं पीते हैं, बल्कि खुद ही बनाकर खाते हैं। चाय भी अपनी बनाई हुई ही पीते हैं।
कहीं विरोध, कही सराहना
अमनदीप सिंह के अनुसार अब तक वह नशा से प्रभावित 22 हजार गांवों में भ्रमण कर चुके हैं। इसमें से अकेले 12 हजार गांव पंजाब के रहे। कहते हैं कि पंजाब में बहुत ही ज्यादा नशे का जाल फैला हुआ है। फिर भी उन्होंने प्रयास कर ज्यादातर को नशा से मुक्त करने में सफलता पाई है। इसी तरह मुहिम में ही 50 हजार से ज्यादा स्कूलों में गए, और नशे के खिलाफ चलाए इस मुहिम में कई बार स्थानीय स्तर पर भी लोगों ने साथ दिया तो कुछ जगहों पर उनको आंशिक रूप से विरोध का भी सामना करना पड़ा। हर परिस्थिति में वह समान रहे।