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पहले चुनाव आचार संहिता बनी बाधा, अब मानसूनी बारिश, बेहाल जनता से बेपरवाह बनी सरकार
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पहले चुनाव आचार संहिता बनी बाधा, अब मानसूनी बारिश, बेहाल जनता से बेपरवाह बनी सरकार

नागौर. नए सडक़ों के निर्माण व हल्के स्तर पर क्षतिग्रस्त हो चुके मार्गों की हालत सुधारने में बजट का रोड़ा होने के साथ ही पहले चुनाव आचार संहिता बाधा बनी, फिर मानसूनी बारिश…! इसके चलते अब तक न तो नई सडक़ें बन पाई, और न ही पुरानी व खराब हो चुकी सडक़ों की मरम्मत कराई जा सकी। जबकि मानसूनी दौर में हल्की बारिश में ही शहर के ज्यादातर सडक़ों की गिट्टियां बिखर कर बाहर आ चुकी हैं। नगरपरिषद के अधिकारियों का मानना है कि निर्माण एवं मरम्मत के लिए प्रस्ताव तो बना था, लेकिन बजट अभाव एवं चुनाव आचार संहिता ही रोड़ा बन गया। अब चुनाव तो समाप्त हो चुके हैं, लेकिन बजट का अभाव अभी बना हुआ है। अब राज्य एवं केन्द्रीय वित्त आयोग से बकाया अनुदान आया तो फिर सडक़ों की हालत को सुधारने के लिए आवश्यक कदम जल्द ही उठाए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि अनुदान जल्द ही आने की उम्मीद है।
इन सडक़ों की हालत है खराब
काजियों का चौक, बाड़ी कुआं, नया दरवाजा क्षेत्र में रघुनाथ मंदिर से माही दरवाजा मार्ग, सुगन सिंह सर्किल से नया दरवाजा, पुराना जिला हॉस्पिटल रोड से अहिंसा सर्किल या बीकानेर रोड की ओर से जाने वाला मार्ग, बाड़ीकुआं, गिनाणी गली, जेठा मार्केट, काठडिय़ा का चौक, बाठडिय़ा का चौक, इंदिरा कॉलोनी, कृषि मंडी के पीछे स्थित आवासीय क्षेत्रों से सटे जोधपुर रोड की ओर जाने वाला मार्ग, किले की ढाल से बाजार के अंदर जाने वाला मार्ग, सर्राफा बाजार, बरतन बाजार, प्रतापसागर तालाब की ओर से हनुमान मंदिर जाने वाला मार्ग, बड़लेश्वर महादेव मंदिर की ओर जाने वाला रास्ता, मिश्रावाड़ी, लोहियों का चौक, महिला थाना के सामने पुराना जिला डाक अधीक्षक आफिस की ओर से जाने वाला मार्ग, नया दरवाजा से बंशीवाला मंदिर व बंशीवाला मंदिर से गांधी चौक की ओर जाने वाले मार्गों की हालत बेहद खराब है।
प्रस्ताव तो बना, लेकिन अमल नहीं हो पाया, जगी उम्मीद
नगरपरिषद की ओर से नए सडक़ों का निर्माण कराने के साथ हल्के स्तर पर क्षतिग्रस्त हुए मार्गों की मरम्मत कराने के लिए परिषद के अधिशासी अभियंता की ओर से पूर्व में करीब चार करोड़ का प्रस्ताव बनाकर तत्कालीन कार्यवाहक आयुक्त रहे सुनील कुमार को भेजा गया था, लेकिन इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई। कारण नगरपरिषद के पास बजट का न होना बताया जाता है। अब परिषद को उम्मीद है कि राज्य वित्त आयोग की तीन करोड़ का एवं केन्द्रीय वित्त आयोग का बकाया लगभग सवा तीन करोड़ रुपए जल्द ही आएंगे। बजट आया तो फिर सडक़ों का काम करा दिया जाएगा।
इससे भी मिलेगा नगरपरिषद को राजस्व
नगरपरिषद के अधिकारियों के अनुसार परिषद का ड्रीम प्रोजेक्ट अहिक्षत्रपुर आवासीय योजना के लिए चिह्नित भूखण्ड का प्रकरण उच्च न्यायालय में लंबित है। इसका निस्तारण भी जल्द ही होने की उम्मीद है। निस्तारण होने पर फिर परिषद के पास राजस्व की कमी नहीं रहेगी। आवासीय योजना के साथ सडक़ों का निर्माण कार्य फिर सहजता से कराया जा सकेगा।
इनका कहना है…
राज्य एवं केन्द्रीय वित्त आयोग से बकाया अनुदान आने के बाद सडक़ों के निर्माण कराए जाने के साथ ही हल्के स्तर पर खराब हो चुके मार्गों की हालत व्यवस्थित करने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
रमेश रिणवा, कार्यवाहक आयुक्त नगरपरिषद नागौर