नागौर. नागौर. राज्य के बाहर से दलहन को प्रसंसकरण के लिए मंगाने पर मंडी टैक्स 1.6 प्रतिशत एवं कृषक कल्याण कोष 0.50 प्रतिशत फीस देने का नोटिफिकेशन सरकार की ओर से जारी करने पर पर भडक़े प्रदेश दाल मिल महासंघ ने बुधवार को हड़ताल का एलान किया है। इस दौरान फूड प्रोसेसिंग से जुड़ी सभी इकाईयां न केवल बंद रखी जाएगी, बल्कि इनके समर्थन में कृषि उपज मंडी ओर से भी अपने-अपने प्रतिष्ठान बंद रखे जाएंगे। कृषि उपज मंडी एक दिन के लिए भी बंद हुई तो लाखों के राजस्व का नुकसान होगा।
प्रदेश सरकार की ओर से मंडी टैक्स एवं कृषक कल्याणकोष दलहन के कच्चे माल पर लगाने के विरोध में दाल मिल महासंघ के पदाधिकारियों में असंतोष के स्वर मुखर हो गए हैं। संघ के पदाधिकारियों का मानना है कि सरकार यदि हठधर्मिता पर अड़ी रही तो फिर तो राज्य की कारोबारी स्थिति, विशेषकर दलहन के उत्पादन पर न केवल भारी असर पड़ेगा, बल्कि लाखों की संख्या में फैक्ट्रियों में काम करने वाले कामगार बेरोजगार हो जाएंगे। प्रदेश दाल मिल महासंघ के कोषाध्यक्ष नितिन मित्तल का कहना है कि इससे कारोबार ही पूरी तरह से चौपट हो जाएगा। जबकि पूर्व में प्रदेश सरकार की ओर से व्यापारिक क्षेत्रो के उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए आश्वस्त किया गया था। कोषाध्यक्ष मित्तल ने कहा कि गत सोमवार को जिला कलक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट कर दिया गया था कि सरकार को उनकी न्यायोचित मांगों को मानना ही पड़ेगा। इसके चलते बुधवार को सांकेतिक हड़ताल होगी। इस संबंध में बुधवार को जयपुर स्थित प्रदेश कार्यालय में होने वाली बैठक में चर्चा कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इन पर पड़ेगा प्रतिकूल असर
कृषि उपज मंडी में प्रतिदिन तकरीबन बीस करोड़ का कारोबार होता है। इसमें सरकार को कम से कम पचास लाख का राजस्व प्राप्त होता है। इसके साथ ही अकेले जिले में ही 25 दाल मिल, पंद्रह मसाला उद्योग सहित पांच आटा मिलें हैं। यहां पर भी बंदी रहेगी। इससे सरकार को अकेले नागौर में जिले से ही एक ही दिन में लाखों कों का नुकसान होगा। जबकि यह बंदी केवल केवल नागौर ही नहीं, बल्कि समूचे राज्य भर में रहेगी। इसके चलते राजस्व नुकसान का एक दिन में ही आंकड़ा करोड़ों में पहुंच जाता है। संघ के पदाधिकारियों के अनुसार सरकार अड़ी रही तो फिर यह बंदी और बढ़ जाएगी। इससे राज्य के राजस्व नुकसान का अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।